कृष्ण विष्णु के अन्य कई अवतारों जैसे अंशावतार नहीं होते | वो पूर्णावतार हैं | एक साथ ही वो कई रूपों में दिखते हैं, चतुर्भुज, शंख-चक्र-पद्म-गदा धारी है तो सखा भी हैं | राधा, सत्यभामा, रुक्मिणी के प्रेमी-पति हैं तो भगवद्गीता के दार्शनिक सखा भी हैं | महाभारत के हिसाब से वो एक राजनीतिज्ञ और योद्धा होते हैं | पुराणों में वो लीलाधर हो जाते हैं |

महाभारत में कृष्ण का जिक्र आदि पर्व से शुरू होता है | उनके बाल काल का वहां वर्णन नहीं है | मगर कृष्ण स्वयं ही कहते हैं कि अगर गीता को समझना है तो उनके पूरे जीवन को देखना होगा | उनकी बाल लीलाओं का वर्णन भागवत और महाभारत का आखरी हिस्सा माने जाने वाले हरिवंश पुराण में है |

इन दोनों पुराणों में यमलार्जुन नाम का प्रसंग आता है | वो कहानी लगभग सभी को पता है | रोज रोज की कृष्ण की शिकायतों से परेशान माता यशोदा एक दिन बाल-कृष्ण को एक उखल में बाँध देती हैं | माता की नजर हटते ही कृष्ण उखल घसीट का ले चले | थोड़ी दूर में दो यमल और अर्जुन के यानि यमलार्जुन का वृक्ष था |

कृष्ण ने उनमें उखल फंसाया और लगे खींचने ! उनके खींचने से पेड़ उखड़ गए और दो गंधर्व नलकूबर और मणिग्रीव प्रकट हुए | दोनों गंधर्व शाप के कारण वृक्ष हो गए थे और कृष्ण ने उन्हें मुक्ति दे दी थी | ये किस्सा पौराणिक है, ऐतिहासिक नहीं है | आश्चर्यजनक रूप से ये मोहनजोदड़ो की खुदाई में भी मिला है |

डॉ. इ.जे.एच. मक्के जब मोहनजोदड़ो की खुदाई कर रहे थे तो उन्हें एक साबुन पत्थर का बना टेबलेट मिला | ये लरकाना, सिंध में मिला पत्थर का टेबलेट यमलार्जुन प्रसंग दर्शाता है | बाद में प्रोफेसर वी.एस. अग्रवाल ने भी इसकी पहचान इसी रूप में की है | प्लेट नंबर 90, ऑब्जेक्ट नंबर डी.के. 10237 के नाम से जाने जाने वाले इस टेबलेट का जिक्र कई किताबों में है |

वासुदेव शरण अग्रवाल सहित कई विद्वानों और इतिहासकारों की किताबों में Mackay report Page 334-335 पर वर्णित plate no.90, object no. D.K.10237 का जिक्र आता है | ऐसा कहा जा सकता है कि सिन्धु घाटी सभ्यता के लोगों को कृष्ण सम्बन्धी कथाओं का पता था | बाकी आपको इस प्लेट के बारे में क्यों नहीं बताया गया ये तो कृष्ण ही जानें ! राधे-कृष्ण, राधे-कृष्ण !!

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आनंद मार्केट रिसर्च में काम करते हैं, और शब्दों में रूचि रखते हैं। किताबों के अपने शौक में वो खूब सारी किताबें पढ़ते हैं। लोगों से बातचीत, समाजशास्त्र, पौराणिक कथाओं, इतिहास से वो अक्सर रोचक कहानियां ढूंढ लाते हैं।

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