कहा जाता है कि सैनिक युद्ध लड़ते हैं जबकि राजनयिक युद्ध को टालने का प्रयास करते हैं। सन् 2011 से 9 अक्टूबर भारतीय विदेश सेवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। आईएफएस अधिकारी पूरे विश्व में भारत गणतंत्र का आधिकारिक प्रतिनिधित्व करते हैं। डेविड मलोन ने अपनी पुस्तक Does the Elephant Dance में भारतीय विदेश सेवा अधिकारियों की प्रशंसा में लिखा है कि “आईएफएस अधिकारी विश्व में सर्वश्रेष्ठ राजनयिक अधिकारियों की श्रेणी में गिने जाते हैं। ब्राज़ील के अधिकारियों के समान ही वे कड़ा प्रशिक्षण लेते हैं, विदेश सेवा में प्रवेश हेतु कठिन परीक्षा देते हैं और पदोन्नति के लिए उन्हें अच्छा प्रदर्शन करना अनिवार्य होता है।”

The Ambassador’s Club


आईएफएस अधिकारियों के ऐसे ही गुणों को उनकी ही लेखनी द्वारा प्रस्तुत करती पुस्तक Ambassadors’ Club अवश्य पठनीय है जिसका सम्पादन पूर्व आईएफएस अधिकारी कृष्ण राजन ने किया है। इस पुस्तक में 16 भारतीय विदेश सेवा अधिकारियों के अनुभव समय-समय पर परिवर्तित होती भारतीय विदेश नीति को भी प्रतिबिंबित करते हैं। विषम परिस्थितियों में तालमेल बिठा कर चलना और किसी भी स्थिति में भारत की छवि को मलिन होने से बचाना आईएफएस अधिकारियों के सम्मुख प्रमुख चुनौती होती है। इस पुस्तक में शिमला समझौते से लेकर जलवायु परिवर्तन पर किये गए समझौते सहित ईदी अमीन जैसे तानाशाह के राज में विदेश सेवा अधिकारियों ने किस प्रकार अपनी क्षमता का लोहा मनवाया और भारत सरकार के प्रतिनिधि के रूप में नेगोशिएट किया इन सबका वर्णन है। प्रत्येक अधिकारी ने इस पुस्तक में अपने विशिष्ट अनुभव साझा किये हैं। जब बर्लिन की दीवार गिरी तब ए माधवन जर्मनी में कार्यरत थे उन्होंने उस समय का विश्लेषण करते हुए भारत का पक्ष रखा है। प्रकाश शाह ने संयुक्त राष्ट्र में भारत का स्थाई प्रतिनिधित्व करने के अपने अनुभव का वर्णन किया है। भारत चीन सम्बंधो पर जगत मेहता ने लम्बा और महत्वपूर्ण लेख लिखा है। पड़ोसी देश नेपाल, भूटान और श्रीलंका के अनुभव भी पूर्व राजनयिकों ने साझा किये हैं। छोटे से देश फिजी में 1987 में आये संकट का वर्णन टी पी श्रीनिवासन ने किया है। फिजी में ऐसा पहली बार हुआ था कि किसी भारतीय मिशन ने उस देश में रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों के साथ मिलकर खुले तौर पर नस्लभेद का विरोध किया था। 

यह पुस्तक केंद्रीय सिविल सेवा के उन अधिकारियों की कार्यशैली से अवगत कराती है जिनके बारे में हम यदा-कदा सुनते तो हैं किंतु लालबत्ती वाला रुतबा कभी नहीं देखते। दि एम्बेसडर्स क्लब प्रत्येक नागरिक को पढ़नी चाहिये जो भारत की विदेश नीति निर्धारित और कार्यान्वित करने वाले अधिकारियों के बारे में जानना चाहते हैं।

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