बिहार के सियासी हलकों के लिए जुलाई का महिना कुछ ख़ास अच्छा नहीं होता। ये आरोपों-प्रत्यारोपों का नहीं, ऐसे सनसनीखेज मामले उजागर होने का महिना होता है, जो महीनों राजनीती पर हावी रहते हैं। करीब बीस साल पहले, सन 1999 में 3 जुलाई भी ऐसी ही थी। उस दौर में फ्रेजर रोड पर स्थित ‘सिल्वर ओक’ रेस्तरां में साधू यादव के साथ गौतम सिंह भी साझेदार थे। वो खुद भी रा.ज.द. में थे और उनके पिता बी.एन.सिंह पर पशुपालन घोटाले के पैसों के मामले में जांच भी चली थी। उनकी लाश एक गेराज में कार के अन्दर पायी गयी। वो अकेले नहीं थे, उनके साथ शिल्पी जैन की लाश थी।

 

दोनों लोग बड़े लोग कहे जा सकते हैं, उनके सात-आठ घंटे से लापता होना ही अपने आप में एक बड़ा मामला था। गाँधी मैदान थाने के अंतर्गत आने वाले एम.एल.ए. क्वार्टर नंबर 12 के गेराज से मारुती जेन में मिली दो लाशों का ये मामला “शिल्पी जैन हत्याकांड” नाम से महीनों चलने वाला था। पुलिस जांच की गुणवत्ता देखें तो मामला चौंका देने वाला था। पुलिस कार को खिंच कर नहीं, बल्कि चलाकर थाने ले गई, बाद में स्टीयरिंग व्हील पर उँगलियों के कोई निशान ढूंढें नहीं जा सके। शिल्पी जैन का कसूर उसका खूबसूरत होना था। शुरू में इसे कार्बन मोनोऑक्साइड के जहर से हुई दुर्घटना बता कर टालने की कोशिश हुई थी।

 

और जांच हुई तो कहा गया कि पेट के विसरा में एल्युमीनियम के जहर पाए गए और मौत उनसे हुई होगी। शवों पर जूतों के निशान क्यों थे मालूम नहीं। उस समय के सिटी एस.पी. भाटिया अखबार वालों को ये भी नहीं बता पाए कि शिल्पी जैन के शरीर पर एक से ज्यादा व्यक्तियों का सीमेन क्यों था? मामले ने तूल पकड़ा तो सी.बी.आई. को जांच सौंप दी गयी। उन्होंने हैदराबाद से डी.एन.ए. टेस्ट करवाकर जांच करने की कोशिश की लेकिन राजद के युवा नेता बड़े नहीं, ‘बहुत बड़े आदमी’ थे। उन्होंने खून का नमूना देने से इनकार कर दिया और रिपोर्ट में लिखा गया कि नेता जी सहयोग नहीं कर रहे हैं।

 

शिल्पी जैन के भाइयों में से एक ने मामले को दोबारा खुलवाने की कोशिश की थी। 2006 में उनका अपहरण भी हुआ। इतने सालों के मुक़दमे में बस ये साबित हुआ है कि शिल्पी जैन की मौत से पहले उनका कई लोगों ने बलात्कार किया था। हत्या के बदले ये एक आत्महत्या के मामले की तरह दर्ज है। इस साल जुलाई में मुजफ्फरपुर बालिका गृह का मामला सामने आया है। ये कोई आज का मामला हो ऐसा भी नहीं है। इसकी रिपोर्ट काफी पहले अप्रैल में ही जा चुकी थी। लेकिन जैसे ब्रजेश पाण्डेय के मामले में देरी होती रही, वैसे ही ब्रजेश ठाकुर के मामले में भी दो महीने लगा दिए गए।

 

शुरूआती मेडिकल जांच बताती है कि मुजफ्फरपुर बालिका गृह में एक दो नहीं 29 बालिकाओं के साथ बलात्कार हुआ है। सवाल ये भी है कि ये 29 लड़कियां वहां से कहीं गयीं, या वहां कोई आया और किसी को खबर नहीं हुई? स्थानीय अधिकारी जो हर हफ्ते वहां व्यवस्था की जांच के नाम पर आते रहे उन्हें भी पता नहीं चला? कौन सा टिन का चश्मा पहनकर जांच के लिए अधिकारी आते थे! एक बार फिर से आरोप बड़े सफेदपोशों पर है। किसी की पत्नी अब अपराध सिद्ध होने पर मंत्रिपद छोड़ने की बात कर रही है तो कोई आरोप लगाने वालों पर मानहानि का दावा कर रहा है।

 

बाकी सरकार शराबबंदी से लेकर दहेज़बंदी तक सबको महिलाओं के हित में लिए फैसले बताती है, सो मान लीजिये कि बिहार में बहार है!

शिल्पी जैन के भाई का अपहरण

शिल्पी जैन ने आत्महत्या की थी : सी.बी.आई. रिपोर्ट

शिल्पी जैन हत्याकांड से कोई वास्ता होने से साधू यादव का इनकार

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आनंद मार्केट रिसर्च में काम करते हैं, और शब्दों में रूचि रखते हैं। किताबों के अपने शौक में वो खूब सारी किताबें पढ़ते हैं। लोगों से बातचीत, समाजशास्त्र, पौराणिक कथाओं, इतिहास से वो अक्सर रोचक कहानियां ढूंढ लाते हैं।

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