मोदी सरकार के शुरू होते ही एक मुसहरों के चूहों के शिकार वाली कहानी भी दिखने लगी थी | आम तौर पर अत्यधिक पिछड़े इस समुदाय के बारे में ज़ात-प्रेमी मीडिया लिखती-बोलती नहीं तो सोशल मीडिया के उदय के साथ ही उनकी कहानी बाहर आ पाई | वो खेतों में बिल ढूंढ ढूंढ कर उनमें पानी डाल देते हैं | कभी कभी कुछ में पुआल (भूसा) ठूंस कर उसे सुलगा भी देते हैं | पानी और धुएं से चूहे, बिलों से भाग भाग कर इधर उधर खेतों में दौड़ने-भागने लगते हैं जिन्हें खदेड़-खदेड़ कर खाने के लिए मारा जाने लगता है |

Sambhaji Bhide “Guru ji”

जब जलाने विष-विद्यालय वाला लड़कियों से अभद्र व्यवहार के लिए दंडित कामी-वामी, खुद को कॉमरेड बताकर “टुकड़े होंगे, इंशाअल्लाह” का नारा लगाने वाला कपटी जैसे तथाकथित नेता सामने आये तो उनकी तुलना मुसहर के चूहों से ही हुई | सवाल ये था कि इन चूहों को मारने के लिए मुसहर बच्चे तो खेत में फ़ौरन इनके बाहर आते ही कूद पड़ते हैं | तो इन चूहों का शिकार करने वाले कहाँ थे ? इसी की आप समुद्र मंथन से भी तुलना कर सकते हैं जिसमें पहले तो विष निकलता है, लेकिन फिर अच्छी चीज़ें निकलती हैं | वो अच्छी, काम की चीज़ें कहाँ थी ?

 

अब महाराष्ट्र प्रकरण में एक “गुरूजी” का नाम सुनाई देने लगा होगा | आखिर संभाजी भिड़े नाम से जाने जाने वाले ये गुरूजी हैं कौन ? महाराष्ट्र के सांगली, सतरा और कोल्हापुर जैसे इलाकों में आने जाने वाले लोग इनके नाम से अच्छी तरह वाकिफ होंगे | अब ये नाम सामने आया है तो खुद को हिन्दू बताने वाले हर व्यक्ति को संघी मान लेने वाले ए.सी. ऑफिस पक्षकार पूछ रहे हैं, ये संघी है क्या ? अगर अपनी ऊँची अट्टालिकाओं से उतर कर जमीन पर आये होते तो उन्हें पता होता कि मनोहर भिड़े नाम के ये सज्जन अच्छे खासे जाने पहचाने हैं |

 

ये संघ से जुड़े नहीं हैं, हाँ हो सकता है सनातन की विचारधारा से जुड़े और लोग भी इनसे मिलने आते-जाते हों | शिवसेना और मानसे के नेताओं से लेकर भाजपा के शीर्ष तक सब इन्हें जानते हैं | क्यों जानते हैं ? क्योंकि करीब 85 साल के इस बुजुर्ग के समर्थक करीब दस लाख युवा हैं | खुद को शिवाजी का भक्त बताने वाले गुरूजी ने “शिव प्रतिष्ठान” नाम के एक संगठन का निर्माण किया | वो मराठा इतिहास पर बोलते हैं और पैरों मे कोई जूते-चप्पल नहीं पहनते | अक्सर पैदल (ट्रेकिंग पर) वो आम लोगों के साथ मराठा इतिहास देखने दिखाने निकलते हैं |

 

“गुरूजी” घनघोर आरक्षण विरोधी हैं और आरक्षण मांगने की तुलना में कहते हैं कि ये तो वैसा है जैसे शेर अंगरक्षक मांगे ! पाकिस्तान के लिए जहर को जहर ही काटता है वाला उनका एक बयान भी पिछले साल की शुरुआत में आया था | गुरूजी जबरदस्त वक्ता हैं और वो जब पैदल किले दिखाते हुए बोलते हैं तो उनके बिना लिखे-तैयार किये हुए भाषण भी आल्हा सुनने जैसा अनुभव देते हैं | रौंगटे खड़े हो जायेंगे | कभी उन इलाकों में हों तो उनके साथ मराठा इतिहास के किले देखने निकाल पड़ियेगा |

 

बाकी आप उस दौर में हैं, जहाँ देश के साथ या देश के विरुद्ध, एक पक्ष तो चुनना ही होगा | दिवार पर बैठ कर क्रिकेट देखने के शौकीनों का समय बीत चुका है | रो के कीजिये या गा के, सफाई में हाथ तो मैले होंगे ही |

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आनंद मार्केट रिसर्च में काम करते हैं, और शब्दों में रूचि रखते हैं। किताबों के अपने शौक में वो खूब सारी किताबें पढ़ते हैं। लोगों से बातचीत, समाजशास्त्र, पौराणिक कथाओं, इतिहास से वो अक्सर रोचक कहानियां ढूंढ लाते हैं।

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