स्कूल के बाहर खड़ी भीड़ बिलकुल खून की प्यासी हो रही थी। घबराये हुए स्कूल के प्रशासनिक अधिकारी और शिक्षक अन्दर बंद थे। मामला कुछ यूँ था कि कुछ दिन पहले स्कूल में शिक्षकों के लिए एक दावत हुई थी। इस दावत में करीब 60 स्कूल के कर्मचारियों का खाना बना था और काफ़ी खाना बच भी गया। लोग खाना फेंकना नहीं चाहते थे तो सोचा किसी को खिला दिया जाए। उस वक्त स्कूल में एन.सी.सी. के बच्चे परेड कर रहे थे।

इस स्कूल में उस वक्त १००३ बच्चे पढ़ते थे, जिसमें से करीब चालीस फीसदी मुहम्मडेन थे। स्कूल के सौ बच्चे एन.सी.सी. में थे, जिनमें से ६७ लड़के थे, और ३३ लड़कियां। उस रोज़ नौ बच्चे परेड में नहीं आये थे तो ९१ बच्चे वहीँ मौजूद थे। इन सौ एन.सी.सी. वालों में से चालीस फीसदी मुहम्मडेन नहीं थे, केवल २७ बच्चे ही मुहम्मडेन थे। तो स्टाफ के ही राजीव जोसफ जो कि एन.सी.सी. के इंचार्ज भी थे, उन्होंने बच्चों से कहा कि वो चाहें तो खाना खा सकते हैं।

स्कूल का प्रशासन इसाई था तो खाने में सूअर का गोश्त भी मौजूद था। राजीव जोसफ ने साफ़ साफ़ बता दिया कि खाने में सूअर का मांस भी है, इसलिए मुहम्मडेन बच्चे दूर रहें। एक मुहम्मडेन बच्चे ने घर जाकर ये बात बताई, घर से बात स्थानीय जमात कौंसिल तक पहुंची और उसके बाद ये फ़साद शुरू हुआ था। सूअर के मांस के विरोध में जुटी भीड़ ने स्कूल के शिक्षकों को मारा पीटा, और जमकर तोड़ फोड़ मचाई।

जमात के मुखिया पी.ए.इरशाद का कहना था कि सूअर परोसने के लिए रमजान का महिना क्यों चुना ? इस से समुदाय विशेष की मजहबी जज़्बातों को ठेस पहुँच गई है। इलाके के डिप्टी डायरेक्टर ऑफ़ एजुकेशन जेस्सी जोसफ ने स्कूल के हेडमास्टर और एक शिक्षक को सस्पेंड कर दिया था। कैथोलिक थॉमस वर्गीज और राजीव जोसफ को पुलिस ने हिरासत में भी ले लिया था। स्कूल के कैथोलिक प्रशासन को लम्बे समय तक इसका दंश झेलना पड़ा था।

दो साल पहले जुलाई २०१४ में ये घटना केरल के ही कोट्टायम जिले के एरुमेली गाँव में हुई थी, और स्कूल का नाम था सेंट थॉमस हायर सेकेंडरी स्कूल। आप तो जानते ही हैं कि जैसे हर जगह गौ हत्या प्रतिबंधित नहीं, वैसे ही संविधान के मुताबिक सूअर खाना भी प्रतिबंधित नहीं है। टी.वी. बहसों में बैठे मौलाना फरमाते हैं कि कानून नहीं है इसलिए केरल की गौहत्या जायज है। ऐसे में टी.वी. बहसों के शेखुलर पत्तरकारों को ये घटना याद नहीं आई, उनके रिकॉर्ड में नहीं थी, या उनकी पूछने की हिम्मत ही नहीं हुई वो अलग सवाल है।

(अंग्रेजी अख़बारों में आई खबर का इंडियन एक्सप्रेस से लिंक)

SHARE
Previous articleगौ हत्या का अर्थशास्त्र
Next articleफेसबुक अल्गोरिथम

आनंद मार्केट रिसर्च में काम करते हैं, और शब्दों में रूचि रखते हैं। किताबों के अपने शौक में वो खूब सारी किताबें पढ़ते हैं। लोगों से बातचीत, समाजशास्त्र, पौराणिक कथाओं, इतिहास से वो अक्सर रोचक कहानियां ढूंढ लाते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here