टोपी वाले व्यापारी का किस्सा तो सुना ही होगा ? याद नहीं चलिए हम दोहरा देते हैं | पुराने ज़माने में लोग हमेशा सर ढका रखते थे, कोई पगड़ी से कोई टोपी से स्त्रियाँ आँचल से, तो टोपियों का धंधा अच्छा चलता था | ऐसा ही टोपियों का व्यापारी सर पर टोकरी लादे कभी इस गाँव कभी उस गाँव टोपी बेचने आया जाया करता था | एक बार ऐसे ही एक गाँव से निकल के दुसरे गाँव जाते वक्त बेचारा व्यापारी थक गया | सुस्ताने के लिए एक पेड़ के नीचे टोकरी रख के बैठा और बेचारे की आँख लग गई |

थोड़ी देर में जब व्यापारी की नींद खुली, तो व्यापारी टोकरी उठा के चलने को हुआ | लेकिन ये क्या ! टोकरी तो खाली थी ! घबरा कर व्यापारी ने इधर उधर देखा तो देखता क्या है की पेड़ों पर बंदरों का झुंड बैठा है | उन्होंने टोकरी से सारी टोपियाँ निकाल ली थी और पहन कर पेड़ों पर जा बैठे थे | अब बेचारा व्यापारी परेशान ! बंदरों से टोपी वापिस कैसे ले ? चाहे जितना जतन करे व्यापारी, बन्दर उसकी नक़ल उतारते, खी खी करते और और ऊँची डाल पर जा बैठते | आखिर उसने एक तरीका सोचा | उसने अपनी टोपी उतारी, उसे ज़मीन पर फेंक दिया | बंदरों ने देखा देखी अपनी अपनी टोपियाँ उतारी और ज़मीन पर फेंकने लगे |


व्यापारी ने टोपियाँ समेटी और अगले गाँव की ओर चल दिया | बाद में घर लौटने पर व्यापारी ने अपने पोते पोतियों को भी बंदरों की इस हरकत की कहानी मज़े ले ले कर सुनाई |

कई साल बाद, व्यापारी का पोता उसी रास्ते से टोपियाँ लिए गुजरा | किस्मत की बात वो भी उसी पेड़ के नीचे सुस्ताने लगा जहाँ उसके दादा बैठे थे कभी | जैसे ही लड़के को जरा झपकी आई, बन्दर फिर से नीचे आये और सारी टोपियाँ ले कर भाग गए | लड़का उठा तो टोपियाँ गायब देख के पहले तो परेशान हुआ | जैसे ही उसकी नज़र टोपी पहने बंदरों पर पड़ी उसे तुरंत अपने दादाजी की कहानी याद आ गई ! दादाजी की तरह उसने भी थोड़ी देर नौटंकी की जिसे देखकर बन्दर खी खी करते रहे फिर उसने अपनी टोपी ज़मीन पर फेंक दी |

उसे कैसा करते देख कर सबसे छोटा बन्दर पेड़ से उतर आया | बेचारे को टोकरी से टोपी नहीं मिल पाई थी | उसने ज़मीन पर गिरी टोपी उठाई, सर पे लगाया और फ़ौरन पेड़ पर जा चढ़ा | ऊँची सी डाल से चिल्लाया, “गधे तुझे क्या लगता है किस्से सिर्फ तेरे दादाजी सुनाते हैं ??”

तो कहानी का सार ये था की काठ की हांडी बार बार चूल्हे पर नहीं चढ़ती | तरीके बदलते रहने चाहिए | टोपी और बन्दर देखते ही सब मेरी पोस्ट में राजनैतिक ढूँढने लगते हैं | लिख दिया ताकि सनद रहे, टोपी और बन्दर की कहानी सुनाई है, किसी नेता का नाम नहीं लिया |

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आनंद मार्केट रिसर्च में काम करते हैं, और शब्दों में रूचि रखते हैं। किताबों के अपने शौक में वो खूब सारी किताबें पढ़ते हैं। लोगों से बातचीत, समाजशास्त्र, पौराणिक कथाओं, इतिहास से वो अक्सर रोचक कहानियां ढूंढ लाते हैं।

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