Anand Kumar

  • सोशल मीडिया 2014 के बाद के दौर में संदेशों के प्रचार-प्रसार के सबसे सशक्त माध्यम के तौर पर उभर आया है। अन्ना आन्दोलन में इसकी भूमिका हो, निर्भया आन्दोलन के जरिये बलात्कार कानून बदलवाने में, उसके थोड़े ही बाद के […]

  • छोटे कस्बों में बड़े होने और बड़े शहरों में पले-बढ़े होने में छोटे मोटे अंतर होते हैं। जैसे कोई महंगा, ब्रांडेड बैग हम लोगों को पता ही नहीं था ! पता नहीं होता तो शौक कैसे होता खूबसूरत से बैग का ? कॉलेज-इंट […]

  • टीवी की आवाज कुछ रोज़ पहले कमरे तक आई तो दो लोगों के बात करने की आवाजें थी। किसी सीरियल में एक व्यक्ति दुसरे से पूछ रहा था कि क्या करें खानेखाना? क्या नए निज़ाम को कबूलें या जमीर की सुनें? इतना सुनना काफ […]

  • वेलु नचियार रामनद राज्य की राजधानी रामनाथपुरम से शासन करने वाले राजा चेल्लामुथु सेथुपरी और रानी सकंधीमुथल की इकलौती बेटी थी। वलारी और सिलंबम जैसी युद्ध कलाओं के अलावा वो अंग्रेजी फ्रेंच, उर्दू जैसी कई भाषाएँ भी जा […]

  • महर्षि मार्कण्डेय सप्तशती स्तोत्र के पांचवे अध्याय की शुरुआत में कहते हैं :-
    पुरा शुम्भनिशुम्भाभ्यामसुराभ्यां शचीपतेः |
    त्रैलोक्यं यज्ञभागाश्र्च हृता मदबलाश्र्यात् ||
    इस श्लोक में मुनि कहते हैं […]

  • अगर वो बाघ बहादुर से कहेगा कि पानी तो उसकी तरफ से बहकर बकरे की तरफ आ रहा है तो कहा जाएगा कि तूने आज नहीं किया तो क्या ? बीते कल में तेरे बाप ने किया होगा! फिर शिकारी झपट्टा मारकर एक निरीह प्राणी को चबा जाएग […]

  • Part 1 | Part 2

    अपने कंटेंट को फेसबुक अल्गोरिथम के अनुकूल कैसे बनाते हैं ?

    मार्केटिंग- मीडिया के क्षेत्र में काम करने वाले लोग ही नहीं, आम लोग भी चाहते हैं कि उनकी फेसबुक पोस्ट ज्यादा से ज्यादा लोग दे […]

  • Part 1 | Part 2

    फेसबुक अल्गोरिथम काम कैसे करता है ?

    एडम मोस्सेरी (जो की फेसबुक न्यूज़ फीड के वी.पी. हैं) ने थोड़े समय पहले, 2017 के एफ.8 समिट में, फेसबुक अल्गोरिथम के बारे में समझाया था। अल्गोरिथम समझने क […]

  • लगता है जैसे सदियों पहले की बात हो, मगर एक दौर था जब घर में पत्रिकाएं आती थीं। इन मासिक-त्रैमासिक प्रकाशनों में पाठक अपनी कहानियां भी प्रकाशित होने भेजते थे। अक्सर ये कोई साहित्यिक कृति नहीं, साधारण सी रोज […]

  • संविधान क्या होता है, इसे किसी बच्चे को समझाएं तो शायद हम कहेंगे ये किसी भी देश का सर्वोच्च कानून होता है। सभी नीतियां, राजनैतिक चर्चाएँ सब इसके दायरे में की जाती हैं। देश के नागरिक या नागरिकों की चुनी हुई सरका […]

  • सदियों पहले जब पश्चिमी देशों को भारत पर कब्ज़ा जमाने की जरूरत पड़ी तो वो समुद्री रास्ते से भारत आये। पुर्तगाली उस दौर में मुंबई और गोवा जैसे इलाकों की तरफ काबिज़ हुए और अंग्रेज कोलकाता, मद्रास प्रेसिडेंसी जै […]

  • कश्मीर में वाल्मीकि होते हैं | क्या हुआ कश्मीरी वाल्मीकियों के बारे में नहीं सुना है ? कोई बात नहीं हम बता देते हैं | पुराने ज़माने के सूखे शौचालयों से मल सर पर उठा कर ले जाने वालों कि जरुरत होती थी | आजा […]

  • प्राचीन काल की बात है, करीब हज़ार दिन पहले एक युवक असम में था। वहां गुवाहाटी (गौहाटी) के पास के कामख्या मंदिर में कई साधू जैसे लोग आते जाते रहते हैं। इनमें तांत्रिक भी होते हैं, अघोरी भी, नागा स […]

  • कभी कभी समस्या बहुत छोटी सी होती है, जैसे कभी आपने किसी बंगाली को अपनी बात तमिल में समझाने की कोशिश की है ? या फिर कोशिश कीजिये कि डोगरी में अपनी बात किसी मलयालम भाषी को समझा दें। ये सलाह सुनने में ही मूर्खतापूर्ण […]

  • जिन्हें पेड़ लगाने का अनुभव होगा, उन्हें पता होगा कि पेड़ को पाल कर बड़ा कर देना करीब करीब बच्चे को पालने जितना ही मुश्किल है। जब पौधा छोटा होता है तो उसका काफी ख़याल रखना पड़ता है। धरहरा, जो बिहार के भागलपुर जिले क […]

  • इस से पहले की बिहार राजनीति के अपराधीकरण का जिक्र शुरू करें, एक पुरानी फिल्म “मुगले-आज़म” को याद करना अच्छा रहेगा | आम तौर पर इस फिल्म से इतिहास की ये समझ बनती है कि सलीम ने मुहब्बत के लिए बाप अकबर स […]

  • बांग्ला में योगेन्द्र को अक्सर जोगेंद्र कहा जाता है | बंगाल के दलित नेता थे जोगेंद्र नाथ मंडल | आपने उनका नाम नहीं सुना होगा | आम तौर पर दल हित चिन्तक उनका नाम लेने से कतराते नजर आयेंगे | आजकल जो […]

  • मोदी सरकार के शुरू होते ही एक मुसहरों के चूहों के शिकार वाली कहानी भी दिखने लगी थी | आम तौर पर अत्यधिक पिछड़े इस समुदाय के बारे में ज़ात-प्रेमी मीडिया लिखती-बोलती नहीं तो सोशल मीडिया के उदय के साथ ही उनकी कहानी बाह […]

  • चाय की दूकान पर बैठा पहला व्यक्ति : अरे लेकिन ये हुआ कैसे ? अचानक !

    चाय की दूकान पर बैठा दूसरा व्यक्ति : अचानक क्या ? कई दिन से अन्दर ही अन्दर चल रहा होगा मामला | किसी के दिमाग मे क्या चल रहा है कौन जानता […]

  • लोकतान्त्रिक व्यवस्था में सरकारें आम लोगों के प्रतिनिधि बनाते हैं | जैसे आम लोग होंगे, बिलकुल वैसे ही उनके चुने हुए प्रतिनिधि भी होंगे | आम आदमी के लिए अगर अमीर आदमी ज्यादा बड़ा आदमी होता है और गरीब छोटा आदमी त […]

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