कई बार सापेक्षता के सिद्धांत के साथ एक आइंस्टीन का किस्सा जोड़ा जाता है | कहते हैं वो समय की सापेक्षता के बारे में बताते हुए दो जुड़वां भाइयों का जिक्र करते थे | उनका उदाहरण होता था कि अगर दो जुड़वां भाई हों और एक को किसी यान में बिठा कर प्रकाश की गति से ब्रह्माण्ड का चक्कर लगाने भेज दिया जाए तो वो दो चार सेकंड में जब वापिस आएगा तब तक धरती पर उसके दुसरे भाई के कई साल बीत गए होंगे | यानि एक भाई बिलकुल बूढ़ा हो चुका होगा, लेकिन जो ब्रह्माण्ड का चक्कर लगा कर आया वो उसी उम्र का होगा जब वो गया था |

ठीक ऐसा ही कुछ महाभारत की कहानी में रेवती के साथ भी हुआ था | रेवती की कहानी भागवत पुराण, विष्णु पुराण के अलावा गर्ग संहिता में भी आती है | इन कहानियों के मुताबिक रेवती राजा काकुद्मिन की बेटी थी | राजा को रैवत नाम से भी जाना जाता है | वो पूरी धरती के राजा थे तो उन्होंने जब अपनी बेटी की शादी के लिए पूछा तो रेवती ने सबसे शक्तिशाली से विवाह करने की इक्छा जताई | अब राजा अपनी बेटी के साथ इंद्र के पास पहुंचे |

इंद्र ने उनकी बात सुनी और कहा वायु मेरे सारे बादलों को उड़ा देते हैं | जरूर वो मुझसे शक्तिशाली हैं | तो राजा और रेवती वायुदेव के पास गए, उनसे पूछा क्या आप सबसे शक्तिशाली हैं ? उन्होंने कहा पर्वत मेरे वेग को रोक देता है, वो मुझसे भी शक्तिशाली है | पर्वत से पूछने पर पता चला कि उसका वजन पृथ्वी ने उठा रखा है, पृथ्वी को शेषनाग ने ! अब चिंतित पिता-पुत्री ने सोचा चलो सीधा ब्रह्मा से अपनी समस्या का समाधान करवाया जाए | जब वो ब्रह्मलोक गए तो ब्रह्मा गन्धर्वों का संगीत सुन रहे थे |

रेवती और उसके पिता ने थोड़ा इंतज़ार किया, जब संगीत रुका तो उन्होंने ब्रह्मा को अपने हिसाब से योग्य वरों का नाम बता कर पूछा इनमें सबसे शक्तिसंपन्न कौन है ? ब्रह्मा हंस पड़े | कहा जितनी देर रूककर तुमने प्रश्न किया उतने में तो पृथ्वी के 27 युगान्तर हो गए ! जिनका तुम नाम ले रहे हो उनमें से ज्यादातर तो अब रहे नहीं ! हां जब तुम वापिस जाओगे तो द्वापर युग बीत रहा होगा और उसके अंत में शेषनाग के अवतार बलराम धरती पर होंगे | वो रेवती के लिए उचित वर हैं |

ये कहानी थोड़े बहुत अंतर के साथ तीनों किताबों में आती है | इस तरह रेवती कई युग बीतने पर धरती पे लौटी और उनकी शादी कृष्ण के बड़े भाई बलराम से हुई थी | समय सापेक्ष होता है | जो रेवती के लिए शायद साल भर या कुछ महीनों में होना था, वो सदियों में हुआ | ऐसा ही आम लोगों के लिए भी होता है | जैसे अमेरिका के भूतपूर्व राष्ट्रपति ओबामा लगभग 55 की आयु में रिटायर हो रहे हैं और ट्रम्प 70 की उम्र में अपनी पारी शुरू ही कर रहे हैं |

सबके लिए अपना अपना समय काल है | आपकी सफलता का समय अगर अभी नहीं आया तो साथ के और लोगों को देखकर हताश या निराश होना भी जरूरी नहीं | हो सकता है आपका समय थोड़े साल बाद शुरू होता हो | चरैवेति… चरैवेति…

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आनंद मार्केट रिसर्च में काम करते हैं, और शब्दों में रूचि रखते हैं। किताबों के अपने शौक में वो खूब सारी किताबें पढ़ते हैं। लोगों से बातचीत, समाजशास्त्र, पौराणिक कथाओं, इतिहास से वो अक्सर रोचक कहानियां ढूंढ लाते हैं।

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