बड़े लोग : बुड़बक साला !! बिहारी कहीं का … सवाल पूछता है.. अबे तोहरे बाप ने पूछे थे प्रश्न…
बिहारी : अब का कहें साहिब ऊ स्तीफेंस से कहाँ पढ़े थे?? ससुर करोड़ीमल का तो रास्तो नहीं मालूम.. JNU.. हाँ हाँ इ बामपंथी सा कछु सुना था..
बड़े लोग : तुम्हारी माँ.. (माता पिता पितामह मातामह को कई महिमामय विशेषणों से विभूषित करते हैं..)
अबे गधे नेहरु के नाम पे बामपंथी?? नेहरु खान्ग्रेसी था की नै बे?? साले ग़रीब कहीं के .. सुबह सुबह कहाँ से मुंह उठाये आ गए बे? नर्मदा देखी है??
बिहारी : हां हां.. बड़ी साफ़ सुथरी सी नदी है साहेब.. नदी जैसी तो लगती ही नहीं.. न पिलास्टिक न कचड़ा.. एकदम साफ़.. हम तो गमछा भी ओही में डूबा के खींच आये.. आहा क्या उज्जवल धवल निरमल..
बड़े लोग : चुप साला… हॉस्टल है JNU का.. बकलोल.. national ब्रॉडकास्टिंग बुझाता है?? पूरा देश देख रहा है..
बिहारी : ऊ तो साहेब .. कांग्रेस वाले सांगमा साहेब के ज़माने में देखता था.. सांसद से कहते थे “behave yourself .. पूरा देश आपको देख रहा है..” और एस्पा लगा गए.. एरोम भूके बैठी है मालिक.. देश उसको नहीं देखता??
बड़े लोग : हम ग़रीबों के हितैषी हैं.. देखा नहीं आमार सोनार बांग्ला ??
बिहारी : अच्छा हज़ूर .. आप वहां सोनार बांग्ला में भी तो चुनाव लड़ते थे.. फिर इ बामपंथी निष्पक्ष पत्रकार कैसे हुए??
डमरू की आवाज़ आती है.. और बड़े लोग नाचने लगते हैं.. नाचते नाचते बड़े लोगों की दाढ़ी गिर जाती है.. सारी जनता हंस पड़ी.. मगर फूल कुमारी चुप रहती है..
बड़े लोग : सिंह की दहाड़ हो सामने पहाड़ हो..
बिहारी फिर घसक के पास आता है..
बिहारी : साहेब वो नक्सलबाड़ी के टाइम तो उपमुख्यमंत्री आप ही थे.. सर इस्तीफ़ा ही दे देते विरोध में?? मतलब माना मुख्मंत्री खान्ग्रेसी लेकिन उप्मुक्मंत्री तो आपेहीं…
बड़े लोग : साले गधे !! सिस्टम में रहे बिना सिस्टम बदलोगे क्या??
और बाद लोग फिर से नाचने लगते हैं.. नेपथ्य से डमरू ताशों की आवाज़ आती है.. और नाचते नाचते तमाशे वाले की नाक भी गिर पड़ती है..
इस बार जनता के साथ साथ राजा साब भी हंस पड़े लेकिन फूल कुमारी नहीं हंसी..
बिहारी : साहेब 10 बज गए वो न्यायलय ??
बड़े लोग : हुंह.. ग़रीब कहीं का.. 11 बजे लेट नहीं 3 बजे भेंट नहीं.. वैल्यू गिराएगा हमारी.. “एते जेते तनखा पाई… काज कोरले उपरी चाई” (तनखा आने जाने की मिलती है काम करने के लिए कुछ ऊपर से चाहिए..)
बिहारी : साहेब वो उच्च न्यायलय !! उन्होंने इरोम को छोड़ने का आदेश दिया !!
नेपथ्य से ढोल ताशे और नगाड़ों की आवाज़ आती है.. बड़े लोग फिर से नाचने लगे..
नाचते नाचते बड़े लोगों का पेट गिर गया..

और फूल कुमारी हंस पड़ी…

(30 August, 2014)

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आनंद मार्केट रिसर्च में काम करते हैं, और शब्दों में रूचि रखते हैं। किताबों के अपने शौक में वो खूब सारी किताबें पढ़ते हैं। लोगों से बातचीत, समाजशास्त्र, पौराणिक कथाओं, इतिहास से वो अक्सर रोचक कहानियां ढूंढ लाते हैं।

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