पांचवे #बिहार_डायलॉग में जब साइबर सिक्यूरिटी पर बात चली तो हमारे साथ इसके मनोवैज्ञानिक पहलुओं पर विमर्श करने के लिए डॉ. विनय कुमार भी थे। चर्चा के सत्र में मौजूद छोटे बच्चों के माता-पिता और कई छात्रों ने भी जानना चाहा कि इन्टरनेट से ध्यान भी तो भटकता है। फोन को किनारे रख देने पर भी थोड़ी थोड़ी देर में आते नोटिफिकेशन आपका ध्यान फ़ोन और इन्टरनेट की तरफ खींच लेते हैं। डॉ. कुमार का मत था कि इनसे निपटने के लिए आपको खुद ही प्रयास करने होंगे।

 

जैसे-जैसे ये एक समस्या के तौर पर सामने आता गया, वैसे वैसे इससे निपटने के उपायों पर भी सोचा गया है। उदाहरण के तौर पर आज की तारिख में ऐसे कई एप्प (App) आते हैं जो ईमेल, फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्स एप्प जैसे नोटिफिकेशन एक निश्चित समय के लिए रोक देते हैं। इनके जरिये माता-पिता इस बात पर भी नजर रख सकते हैं कि उनका बच्चा सोशल मीडिया के जरिये क्या कर रहा है। शुरू में हो सकता है कि बच्चे ऐसी पाबंदियों पर नाराज हों, लेकिन उनका भला-बुरा सोचना आखिर आपका ही काम है।

 

एक दूसरी चीज़ होती है आपकी भौतिक मौजूदगी। उसे कमरे में अकेले पढ़ने या खेलने छोड़कर, आप कहीं और बैठे हों तो ये बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा नहीं होता। थोड़ी थोड़ी देर में उनके कमरे का एक चक्कर लगा आना एक अच्छा विकल्प हो सकता है। जब वो पढ़ाई कर रहा हो तो आप भी वहीँ आस पास बैठे कुछ पढ़ रहे हों, ये और भी बेहतर हो सकता है। एकल परिवारों में कामकाजी माँ-बाप बच्चों को उतना समय नहीं दे पाते, इसलिए भी बच्चा संवाद के लिए इन्टरनेट का सहारा लेता है।

 

कई बार तकनीक खुद ही जो विकल्प उपलब्ध करवाती है उनका भी सहारा लिया जा सकता है। कई लोग टैब या फिर मोबाइल पर किताबें पढ़ने की कोशिश करते हैं। ऐसे में नोटिफिकेशन आते ही बार बार ध्यान भंग होता रहता है। इस तरह न तो संदेशों को ध्यान से पढ़ा जा सकता है, न ही किताब को। अगर इलेक्ट्रोनिक उपकरणों पर ही किताबें पढ़नी हों तो मोबाइल या टेबलेट के बदले, किन्डल जैसे उपकरणों का इस्तेमाल कहीं बेहतर होता है।

 

पुराने दौर की तरह अब ये उतनी मुश्किल से उपलब्ध नहीं है इसलिय इसे आसानी से खरीदा जा सकता है। उसके अलावा किन्डल पर किताबें पढ़ने के अलावा कुछ भी नहीं किया जा सकता। इसपर व्हाट्स एप्प या दूसरे नोटिफिकेशन नहीं आयेंगे इसलिए ध्यान भी भंग नहीं होगा। बच्चे जो आपको मोबाइल में लगा देखकर काफी कम उम्र में ही उससे यू ट्यूब विडियो देखने के लिए मोबाइल छीनना सीख जाते हैं उससे भी मुक्ति मिल जायेगी।

 

कुल मिलाकर ये कहा जा सकता है कि इन्टरनेट से होने वाली ऐसी समस्याओं से निपटना आपको खुद ही सीखना होगा। ये ऐसी चीज़ नहीं जो आज है, और कल चली जायेगी। थोड़े से अनुशासन और कुछ तकनीक का सोच समझकर इस्तेमाल करने से इससे निपटा जा सकता है।

#BiharDialogue 5 #SaarthakSamvaad
#SafeOnline

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आनंद मार्केट रिसर्च में काम करते हैं, और शब्दों में रूचि रखते हैं। किताबों के अपने शौक में वो खूब सारी किताबें पढ़ते हैं। लोगों से बातचीत, समाजशास्त्र, पौराणिक कथाओं, इतिहास से वो अक्सर रोचक कहानियां ढूंढ लाते हैं।

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