प्रोफेसर उडुपी रामचंद्र राव अब हमारे बीच नहीं रहे और मेरे जैसों के लिए छोड़ गए इसरो के इतिहास पर लिखी अपनी अनमोल कृति: “India’s Rise as Space Power”. इस पुस्तक में इसरो का स्वर्णिम इतिहास दर्ज है। भारत की वैज्ञानिक सैटेलाइट परियोजना का उद्भव, आर्यभट, भास्कर उपग्रह की कहानी, राकेश शर्मा का अंतरिक्ष में जाना, ASLV, INSAT, रिमोट सेंसिंग, संचार उपग्रह, क्रायोजेनिक, PSLV, GSLV इत्यादि तकनीक से लेकर इसरो और इंडस्ट्री के बीच भागीदारी की नींव कैसे रखी गयी यह सब कुछ इस पुस्तक में लिखा है। भारत ने रूस के साथ मिलकर किस तरह अंतरिक्ष विज्ञान में पदार्पण किया यह जानना हो तो यह पुस्तक अवश्य पढ़ें।

 

पुस्तक के अंतिम चैप्टर सं 21 में प्रो० राव लिखते हैं: The basic secret behind the outstanding success of the Indian space program lies in its vision of building a totally goal oriented application program to tackle the most important problems facing the nation in a cost effective manner. The organizational structure adopted, the management practices introduced and the leadership policies responsible for the development of motivated manpower were behind the successful execution of the programs in a systematic manner. Each major development started with a learning phase, went through an experimental phase to establish competence and then initiated the operational phase which can ensure the flow of benefits from the application of technology to the very grassroots of the Indian society.

 

इस पुस्तक में बहुचर्चित चन्द्रयान और मंगलयान परियोजनाओं पर प्रकाश नहीं डाला गया है। सम्भवतः इसलिए क्योंकि जब प्रो राव ने यह पुस्तक लिखी होगी तब चन्द्र और मंगलयान प्रोजेक्ट शैशवावस्था में रहे होंगे। पुस्तक में index भी नहीं है। प्रोफेसर यू आर राव भारत की सैटेलाइट परियोजना के जनक और इसरो के भूतपूर्व चेयरमैन थे। उनके निर्देशन में भारत ने 18 से अधिक सैटेलाइट प्रक्षेपित किये। प्रो राव भारत के प्रथम अंतरिक्ष वैज्ञानिक थे जिन्हें अमेरिका के सैटेलाइट हॉल ऑफ़ फेम में स्थान दिया गया था। (अश्रुपूरित श्रद्धांजलि के साथ।)

 

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