हमारे पैदा होने से कुछ दशक पहले प्रोफेसर यशपाल ने (१९५८ में) पी.एच.डी. की थी। उस दौर में वो टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ़ फंडामेंटल रिसर्च, मुंबई में नौकरी किया करते थे। जब हमने पहली बार उन्हें टी.वी. पर देखा तो वो अपनी शुरूआती नौकरी से रिटायर हो चुके थे। उसके बाद भी उन्होंने विज्ञान पर पढ़ना पढ़ाना छोड़ा नहीं था। अस्सी के दशक में वो योजना आयोग के सलाहकार रहे, फिर यूनाइटेड नेशन्स की अन्तरिक्ष के शांतिपूर्ण इस्तेमालों की समिति में सेक्रेट्री भी थे। इसी दशक में वो डिपार्टमेंट ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के सचिव भी रहे।

 

सन १९८६ से लेकर १९९१ तक वो यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (यू.जी.सी.) के प्रमुख भी थे। एक विश्वविद्यालय के स्नातक पाठ्यक्रम में दुसरे वर्ष पर होने से जो किसी और विश्वविद्यालय में सीधा सेकंड इयर में दाखिला नहीं लिया जा सकता उस से हमें भयानक चिढ़ है। संभवतः हमने ये प्रोफेसर यशपाल को सुन सुन कर सीखा है। दूरदर्शन पर उनके आने के वजह से पता नहीं कितने भारतीय बच्चों ने भौतिकी (फिजिक्स) के प्रयोग भी सीखे होंगे। राष्ट्रिय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उन्हें विज्ञान सम्बंधित अनगिनत अवार्ड मिले। सन २०१३ में उन्हें पद्मभूषण भी दिया गया था।

 

जून २००९ में उन्होंने भारत की उच्च शिक्षा में सुधार सम्बन्धी अपनी रिपोर्ट, मानव संसाधन विकास मंत्रालय को सौंपी थी। सुधार का नाम लेते ही “भगवाकरण” का विलाप करते छाती कूट कुहर्रम मचाने वाले गिरोहों की वजह से शायद वो रिपोर्ट कहीं धूल खाती पड़ी होगी। उनका एक और कारनामा छत्तीसगढ़ के फर्जी विश्वविद्यालय बंद करवाना भी था। सारे आंकड़े जुटा कर उन्होंने शिक्षा के नाम पर धूर्तता करने वालों के खिलाफ मुकदमा लड़ा था। छत्तीसगढ़ सरकार और शिक्षा की दुकानों पर बैठे प्रोफेसर-डीन-रजिस्ट्रार रुपी दलालों को फिर फ़रवरी २००५ में कुल ११२ ठगी के अड्डे बंद करने पड़े थे।

 

झांग (जो अब पाकिस्तान है) में 26 नवम्बर, 1926 को जन्मे प्रोफेसर यशपाल का 24 जुलाई 2017 की रात उनके नॉएडा (उत्तर-प्रदेश) आवास पर निधन हो गया। विज्ञान शिक्षा के स्तम्भ को नमन। उम्मीद है शिक्षा सुधार की उनकी योजनायें दोबारा प्रकाश में आएँगी।

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आनंद मार्केट रिसर्च में काम करते हैं, और शब्दों में रूचि रखते हैं। किताबों के अपने शौक में वो खूब सारी किताबें पढ़ते हैं। लोगों से बातचीत, समाजशास्त्र, पौराणिक कथाओं, इतिहास से वो अक्सर रोचक कहानियां ढूंढ लाते हैं।

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