ये उल्टी बात मेरी (या मेरे जैसे किसी गधे की) नहीं है, ये कबीरदास जैसे समझदार लोग बरसों पहले कह गए हैं। इसे काम करते देखना है तो अपनी पढ़ाई के बारे में सोचिये जहाँ किताबों से बड़े बड़े अध्याय पहले पढ़ा दिए जाते हैं और फिर अंत में प्रश्न होते हैं। जीवन इसके ठीक उल्टे क्रम में चलता है। आपके सामने समस्या परोस दी जाती है और उससे निपटने के क्रम में आप सीखते हैं। यानी पढ़ाई का ठीक उल्टा, सवाल पहले और सीख का अध्याय उसके बाद। इसका एक फायदा ये भी है कि जीवन की पाठशाला में सीखे सवाल आप भूलते नहीं, स्कूल की किताबों में आपने क्या पढ़ा था, वो वर्षों बाद याद रहेगा या नहीं पता नहीं।

 

यही वजह थी कि जब बाढ़ के बारे में बात शुरू करनी थी तो हमने सबसे पहले तो मौसम उल्टा चुन लिया। यानी जब देश सूखे और “पानी बचाओ” के मुद्दे पर होता तो हमने “पानी से बचो” की बात शुरू की। ऐसा इसलिए क्योंकि बाढ़ अगस्त के महीने के आस पास कभी, किसी रात अचानक आएगी। उस रात अचानक तैयारी कर के आप बाढ़ से बच नहीं सकते। आपदा प्रबंधन पहले से नहीं किया जाता, ये हर रोज के जीवन का हिस्सा होता है। आपदा से अगर किसी दिन आपकी मुलाकात पहली बार होगी उस दिन आप बिलकुल वही करेंगे जो हरगिज नहीं करना चाहिए। दिशाभ्रम की स्थिति में या मोटरसाइकिल-कार चलाना सीखते व्यक्ति को देखकर आप ये सीख सकते हैं।

 

जब व्यक्ति नया नया गाड़ी चलाना सीख रहा हो और अचानक सामने कुछ आ जाए तो वो ब्रेक नहीं दबाता। वो पक्का उल्टी हरकत करेगा, यानि एक्सेलरेटर दबाकर स्पीड और बढ़ा लेता है। दिशा भ्रम में भी यही होता है, जो आपको सही लगेगा वो पक्का उल्टी तरफ जाने वाला रास्ता होगा। उत्तर के बदले कोई पूरब या पश्चिम में नहीं बढ़ता, वो सीधा उत्तर के बदले दक्षिण का रुख करेगा। सामना करने कि तैयारी जब आप नहीं करते तो और क्या होता है? आप “जिस दिन आएगा उस दिन देख ली जायेगी” के वहम में भी जीते हैं। ये वहम कैसा होता है, ये आप किसी बिहारी (किसी भारतवासी से भी) पूछकर समझ सकते हैं। जब बाढ़ आये तो पूछियेगा बाढ़ क्यों आती है? पूरी संभावना है कि वो कहेगा, नेपाल पानी छोड़ देता है जी! कोशी का पानी नेपाल से छोड़े जाने से बाढ़ आती है जी! हम तो डूब जाते हैं जी! क्या करें जी!

 

सच्चाई ये है कि जो कोशी का बांध है वो भारत के नियंत्रण में है। जिस बाँध का नियंत्रण भारत सरकार के कर्मचारियों के हाथ में हो, उसे नेपाल कैसे खोलेगा? बारिश का पानी जब नेपाल-भूटान की तरफ से आता है तो उसके दबाव में कहीं बांध ना टूटे इसलिए बाँध भारतीय कर्मचारी ही खोलते हैं। आप मुगालते में रहें, उन्हें गालियाँ-बददुआ ना दें इसलिए नेपाल की तरफ से पानी ज्यादा आ रहा है का आधा सच कहना और बाकी को कोशी के शोर में डूब जाने देना उनके लिए भी सुविधाजनक है। आपने कभी पूछा नहीं, उन्होंने कभी बताया नहीं। ये दूसरी वजह थी कि हमने बाढ़ पर बात करने की शुरूआत की तो उल्टा तरीका इस्तेमाल किया। हमने सर्वेक्षण के लिए एक प्रश्नपत्र नुमा गूगल फॉर्म बनाया और लोगों के लिए उसे खुला छोड़ दिया। इसमें मुश्किल, डाटा से सम्बंधित सवाल भरे थे।

 

जवाब ढूँढने की जिन्होंने कोशिश की थी उन्हें अब बिहार की बाढ़ का काफी कुछ पता होगा। अगर नहीं भी पता तो एक बार से प्रश्न देखिये, बात कीजिये। क्योंकि चुप रहने से भी बाढ़ का आना तो रुकेगा नहीं!

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आनंद मार्केट रिसर्च में काम करते हैं, और शब्दों में रूचि रखते हैं। किताबों के अपने शौक में वो खूब सारी किताबें पढ़ते हैं। लोगों से बातचीत, समाजशास्त्र, पौराणिक कथाओं, इतिहास से वो अक्सर रोचक कहानियां ढूंढ लाते हैं।

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