महाभारत का खिलभाग हरिवंश पुराण कहलाता है। भगवद्गीता में श्री कृष्ण कहते हैं कि अगर भगवद्गीता का सार समझना हो, तो मेरे जीवन को देखो। इस वजह से महाभारत पढने वाले हरिवंश पुराण भी पढ़ते हैं। महाभारत से अलग हरिवंश पुराण में करीब 6000 श्लोक होते हैं (critical edition, भंडारकर रिसर्च इंस्टिट्यूट, पुणे के मुताबिक)। अलग अलग पाठों में थोड़ा सा अंतर रहता है। महाभारत में श्री कृष्ण का प्रवेश काफी बाद में है, हरिवंश में कृष्ण के बचपन और उनसे जुड़ी कहानियां ही मुख्य हो जाती हैं।

 

इनमें ये भी नजर आता है कि हर बार कृष्ण मुखिया नहीं होते थे। कई बार वो सिर्फ हेतु बनते और मुखिया की जिम्मेदारी बलराम के कन्धों पर होती थी। ऐसी ही कहानियों में से एक है धेनुकासुर की कहानी। कृष्ण और बलराम उस समय छोटे थे और गुरुकुल जाने की उम्र भी नहीं हुई थी तो वो गौ चराने आस पास जाते रहते थे। ऐसे ही घुमते हुए वो लोग एक दिन गोवर्धन पर्वत के उत्तरी दिशा में यमुना के किनारे पहुंचे। इस इलाके में ताड़ के कई वृक्ष थे जिनकी खुशबु से ग्वाल बाल खींचे चले आये थे।

 

इस इलाके में लोग इसलिए नहीं जाते थे क्योंकि ये कंस के पोषित गर्दभों का क्षेत्र था। धेनुकासुर नाम का गधों का मुखिया इस इलाके पर राज करता था। कृष्ण के उकसाने पर सब इस ताड़ के वन में जा घुसे। जैसे ही ग्वालों और बलराम ने पेड़ों को हिला कर ताड़ के फल तोड़ने की कोशिश की धेनुकासुर को खबर लग गई। अपने चेले-चपाटी गधों के साथ वो मौका ए वारदात पर आ धमका और लगा सबको काटने ! जैसे ही उसने बलराम पे दुलत्ती झाड़ी तो बलराम ने उसकी दो टांगे पकड़ ली। घुमा कर उसे एक पेड़ पर दे पटका।

 

पेड़ पर पटके जाने से गर्दभ धेनुकासुर की सीने की हड्डियाँ टूट गई और वो मारा गया। उधर बलराम के बाकी साथियों, यानी कृष्ण और अन्य ग्वाल-बालों ने भी बाकी के गधों को पीट-पाट कर निपटाना शुरू कर दिया था। थोड़ी ही देर में गधे मार भगाए गए और इलाके पर कृष्ण-बलराम का कब्ज़ा हो गया। कुल मिला कर श्री कृष्ण ने खुद काफी कम किया, मगर काम हो गया। उतपत देस के चुनावी समर में गधों को लेकर उठा पटक चल ही रही है तो ये किस्सा इसलिए याद आया क्योंकि देवी-देवता का वाहन ना हो, और असुर जिसका रूप ना ले, ऐसा कोई जीव याद नहीं आता। वाहन के तौर पर तो शीतला माता के वाहन में गधे होते हैं। असुर के रूप में गधों को दिखाए जाने का शायद ही कोई और उदाहरण मिलेगा।

 

चुनावी समर में कौन दुलत्ती झाड़ेगा और कौन पटका जाएगा ये तय होने में हफ्ता भर बाकी है, हमने सोचा, मौके का फायदा उठा कर महाभारत के भूले बिसरे से किस्से भी याद दिला दें।

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आनंद मार्केट रिसर्च में काम करते हैं, और शब्दों में रूचि रखते हैं। किताबों के अपने शौक में वो खूब सारी किताबें पढ़ते हैं। लोगों से बातचीत, समाजशास्त्र, पौराणिक कथाओं, इतिहास से वो अक्सर रोचक कहानियां ढूंढ लाते हैं।

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