चीज़ों को समझने के लिए उदाहरण लेना एक आसान काम है लेकिन पहले एक काम चलाने लायक परिभाषा भी होनी चाहिए। आखिर जिस क्राउड-सौर्सिंग (Crowd Sourcing) कि हम बात कर रहे हैं वो क्या है या कैसे काम करेगा। अंग्रेजी शब्द क्राउड का सीधा सा मतलब है भीड़ और सौर्सिंग मतलब स्रोत। क्राउड-सौर्सिंग भीड़ को, यानि बहुत से अनजाने-असम्बद्ध लोगों के समूह को एक ख़ास मकसद के लिए स्रोत कि तरह इकठ्ठा करने की विधा को कहते हैं। पुराने जमाने में श्रम-दान या शादी-ब्याह जैसे अवसरों पर भी जैसे काम में मदद करने कई लोग जुट जाते थे ये वैसा ही है।

 

आज भी मंदिरों या गुरुद्वारों में जो सेवा होती है वो जिस तरीके से चलती है उसे एक तरह से क्राउड सौर्सिंग कह सकते हैं। इन्टरनेट के फैलने के साथ जैसे जैसे डाटा ट्रान्सफर कि दरें कम हुई, और मोबाइल के जरिये इन्टरनेट हर हाथ में पहुँचने लगा, इन्टरनेट का इस्तेमाल भी क्राउड सौर्सिंग में होने लगा। आज कि तारीख में ये जानकारी जुटाने का सबसे सरल साधन होता है। जैसे ही इस बार अंतर्राष्ट्रीय स्त्री दिवस (International Women’s Day) करीब आया तो हर बार कि तरह भारत विरोधी जमातों ने स्त्री कि आड़ में हिन्दुओं पर हमले के लिए इसका भी इस्तेमाल करने कि कोशिश की।

 

अफ़सोस कि अब पुराने दौर कि तरह सनातनी संस्कृति हमलावर के प्रति उपेक्षा भरी सहिष्णुता या अहिंसा का भाव नहीं अपनाती। किराये की कलमों कि तरह उनके पास दूर-संचार के वृहद स्रोत नहीं होते फिर भी सोशल मीडिया के जरिये परम्परागत पेड मीडिया को कड़ी टक्कर मिलने लगी है। इस सिलसिले में एक सवाल आया कि हम अपने नगर-ग्रामों का नामकरण कैसे करते है? कितने शहर आज कि तारिख में ऐसे हैं जो देवियों के नाम पर हैं? पुराने दौर के सनातनियों कि तरह नारी-शक्ति को सम्मान देने की अपनी परंपरा को क्या हमने जारी रखा है?

 

क्राउड सौर्सिंग का नतीजा ये हुआ कि इस सवाल के ढेरों जवाब आ गए। जिसे भारत का भूगोल बहुत अच्छी तरह नहीं भी पता उन्हें भी एक सवाल के थ्रेड से पता चल गया कि कौन से शहरों के नाम देवियों के नाम पर हैं। इन सभी जवाबों को अनुराधा गोयल ने एक जगह सहेजने कि कोशिश कि है। आप चाहें तो उन्हें इकठ्ठा अनुराधा गोयल के वेबपेज पर देख सकते हैं। इस क्रम में कुछ तो पहले से ही पता थी, मगर कई शहरों के बारे में अनोखी जानकारियां भी आयीं। पहले से मालूम में शायद कई लोगों को पता होगा कि पटना का नाम पाटन देवी और मुंबई का मुम्बा देवी के नाम पर नाम रखा गया है।

 

भारत में कभी 51 शक्तिपीठ हुआ करते थे, तो ये तो तय है कि कम से कम इक्यावन नगर देवियों के नाम पर हैं। इसके अलावा सभी पुराने शहरों कि अपनी नगर देवी होती है। जैसे श्रीनगर का नाम श्री यानि लक्ष्मी के नाम पर है, वहां हरी पर्वत पर शारिका शक्ति पीठ में श्री यंत्र के प्राकट्य के कारण भी उसका नाम है। जिस मीरजापुर को अक्सर किसी मिर्ज़ा के नाम पर मिर्जापुर मान लिया जाता है उसका “मीरजा” समुद्र से उत्पन्न यानि लक्ष्मी के अर्थ वाला है। हरियाणा का जींद, जयंती देवी के नाम पर है और अब जिसे बांग्लादेश कि राजधानी ढाका कहते हैं वो भी दक्षिणेश्वरी देवी के नाम पर है। ये मंदिर बांग्लादेश का “राष्ट्रिय मंदिर” है, ऐसा इन्टरनेट बताता है।

 

जबतक आप पूरी लिस्ट देखें तबतक हम ऐसी ही लिस्ट बनाने और उसे सहेजने पर चर्चा कर सकते हैं। अगर एक ही विषय पर जानकारी इकठ्ठा करनी हो तो उसे टेबल (Table) के रूप में जमा किया जाना सुविधाजनक होता है। इस काम के लिए सबसे आम MS Excel लगभग हर कंप्यूटर पर होता है। इसी का एक थोड़ा सा बदला रूप गूगल भी उपलब्ध करवाता है। गूगल शीट (Google Sheets) भी ऐसा करने का विकल्प देता है। गूगल शीट जीमेल जैसी सुविधाओं के साथ जुड़ा और मुफ्त है, साथ ही इन्टरनेट पर होने कि वजह से ये करीब करीब हर जगह मिल जाता है। आपको फाइल अपने साथ लिए चलने कि जरूरत नहीं होती।

 

चाहे माइक्रोसॉफ्ट का एक्सेल इस्तेमाल करें या गूगल शीट, पहला कदम एक नया ब्लेंक डॉक्यूमेंट/शीट (Blank document) बनाने पर शुरू होता है। अगला कदम आप हर कॉलम (Column) को एक नाम एक हैडिंग (Heading) देंगे जिस से पता चले कि उसमें किस किस्म के तथ्य (Data) हैं। तीसरे कदम में आप एक एक कर के हर कॉलम में डाटा फीड करना शुरू करते हैं। थोड़ी ही देर में अलग अलग जगहों से इकठ्ठा की हुई जानकारी एक जगह जमा हो जायेगी। भविष्य में एक मुद्दे पर आपके पास एक सूचना नहीं बल्कि एक ही मुद्दे के लिए दर्जनों उदाहरण होंगे।

 

ये कैसे किया जाए, उसके उदाहरण के रूप में सरकारों के लगाये फिल्मों-किताबों इत्यादि पर प्रतिबंधों की जानकारी को एक जगह इकठ्ठा करने कि कोशिश कि है। आप मेरी ये गूगल शीट ऑनलाइन देख (डाउनलोड कर) सकते हैं। गौहत्या सम्बन्धी मामलों, जिसमें गौरक्षकों या पुलिसकर्मी को तस्करों-चोरों ने मार दिया हो उसकी जानकारी ऐसे ही इकठ्ठा कि जा सकती है। कब जघन्य अपराधों पर मीडिया में शोर मचा, कब चुप्पी साध ली गई, उसके उदाहरण भी इकट्ठे किये जा सकते हैं। ध्यान रखिये कि सिर्फ घटना-जानकारी को लिख देने भर से काम नहीं चलता। आपको हर बार जानकारी का स्रोत बताना होगा, इसलिए हर बार जानकारी के साथ एक कॉलम लिंक का रखिये, जिसमें खबर का स्रोत बताया हुआ हो।

 

क्राउड सौर्सिंग जानकारी जुटाने का न्यूनतम खर्चे वाला साधन होता है। छात्र इसका इस्तेमाल अपने प्रोजेक्ट रिपोर्ट या शोध के लिए कर सकते हैं। आप छात्र ना भी हों तो अपने शोध के लिए इस तरीके से जानकारी इकठ्ठा कर सकते हैं जो बाद में और लोग भी इस्तेमाल कर पायें। किताबों के लिए शोध करते लेखक भी लोगों से पूछ पूछ कर इसी तरह क्राउड सोर्स करते हैं। उपलब्ध स्रोतों का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल, व्यक्ति या संगठन के लिए हमेशा फायदेमंद होता है ये अलग से बताना जरूरी नहीं होता। ये साधारण सी बात सभी जानते ही हैं। हाँ उसका कोई तकनिकी नाम भी होता है, ये कुछ लोगों को ना पता हो ऐसा हो सकता है।

 

क्राउड सौर्सिंग को बस वो नाम समझिये जो बरसों से किये जाने वाले काम को कंप्यूटर कि दुनियां में पहचानने के लिए दिया गया है। अपने हितों के लिए इसका इस्तेमाल आप कैसे करते हैं वो आपपर निर्भर है।

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आनंद मार्केट रिसर्च में काम करते हैं, और शब्दों में रूचि रखते हैं। किताबों के अपने शौक में वो खूब सारी किताबें पढ़ते हैं। लोगों से बातचीत, समाजशास्त्र, पौराणिक कथाओं, इतिहास से वो अक्सर रोचक कहानियां ढूंढ लाते हैं।

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