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Litrary musings

सब पता है, नजर कहाँ होती है !

“इतने गौर से क्या देख रहे हो लगातार ?” मॉल की रेलिंग के ज्यादा नज़दीक शेष को खड़ा देखते ही ईति को फ़िक्र होने...

हमें पसंद हो…

“अब खूबसूरत कब कहा है तुम्हें ? हमें पसंद हो इतना ही तो बताया था न ?”, बड़ी मुश्किल है, लड़कियों को ख़ूबसूरत होना...

काश ऐसा हो की तुझपे ही तेरा दिल आये..

आवाजें तरह तरह की कैसी प्यारी होती हैं, शायद यही वजह है की संगीत और गीत सबको पसंद होते हैं। वो भी भारी भरकम...

थोड़े रंग डालिए अपनी दुनियाँ में

संत थे कबीर | सब संतों की तरह सुबह से ही सत्संग जुटाए बैठे थे | दूर दूर से सब उनकी वाणी सुनने आये,...

हर बात में कोई नहीं ?

"कोई नहीं" हर बात में कोई नहीं ? कोई बात नहीं का छोटा किया जाना कोई नहीं हो जाता है लेकिन बड़े शहर में...

हम वो बिहारी नहीं हैं !!

भगवान की कसम खा कर कहता हूँ भाई. हम वो बिहारी नहीं हैं जो लालू बताते रहे हैं आपको | हम वो बिहारी हैं...

तुम यहाँ कैसे ?

“भाई छोटी गोल्ड फ्लेक देना, पांच”, अभी बचे हुए दस रुपये पचास के नोट में से उठाने ही जा रहे थे की पीछे किसी...

ये भी गुजर जायेगा

एक बार एक राजा था, बाकि सारे राजा लोगों की तरह सनकी था | पैसे और पॉवर का थोडा घमंड तो जायज है !!तो...

एक जनवरी 2015 की ..

बातें याद रखने के मामले में हम हमेशा अच्छे थे | दर्ज़नों कहानियां याद रहती हैं, इसके लिए हम छोटा सा एक ट्रिक इस्तेमाल...

हर साल जो बदलता ऐसा तो सिर्फ़ कैलेंडर होता हैं ना...

साड़ी के प्लेट सही करना अच्छी खासी मेहनत का काम है शायद, काफ़ी वक़्त लगता है पहनने वाले के हिसाब से बिलकुल सही प्लेट...

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