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Book Reviews

महाभोज : मन्नू भंडारी

थोड़े पुराने ज़माने में, यानि कुछ दस साल पहले लेखक होना कठिन था। अपने रोजमर्रा के काम के बीच जब आप कुछ लिखते भी...

कोहबर की शर्त

“ये कोहबर का द्वार है पहुना, इसे ऐसे नहीं लांघने पाओगे ! यहाँ दुआर पढ़ना पड़ता है |” ये संवाद ‘कोहबर की शर्त’ नाम...

Wonder That Was India : A. L. Basham

इतिहास कई चीज़ों को मिला कर बनता है | ये एक सभ्यता की कहानी होती है, उसके धर्म, उसकी सत्ता, उसके दर्शन से लेकर...

आज भी खरे हैं तालाब

पुराने ज़माने की बात है | कुडन, बुडन, सरमन और कौराई चार भाई थे | जैसा कि आम तौर पर उस ज़माने में होता...

केन फोल्लेट: जैकडाव्ज

करीब बीस साल पहले हम कुछ रोबिन कुक के, कुछ गॉडफादर जैसे, कुछ हर्रोल्ड रोब्बिन्स के उपन्यास पढ़ चुके थे तो केन फोल्लेट का...

आयरन कर्टेन : ऐनी अपप्लेबौम

सन्दर्भ के बिना की बात चली ही है तो सन्दर्भ का इतिहास में महत्व भी देखा जाना चाहिए | भारत की आजादी के वक्त,...

भगवानदास मोरवाल की “हलाला”

हो सकता है “काशी का अस्सी” पढने वालों ने भी यही सवाल सोचा हो | भाषा की शुचिता, या इलाके की मिटटी की खुशबु...

वामपंथ का काला इतिहास

दुनियां के जघन्यतम अपराध क्रांतियों की आड़ लेकर हुए हैं | विश्व युद्धों की जड़ में कहीं ना कहीं क्रांति की आड़ में छुपे...

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