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Hindi Book Reviews

मेघदूत: एक पुरानी कहानी

पंडित हजारी प्रसाद द्विवेदी हिंदी और संस्कृत के जाने माने विद्वानों में से हैं। उनके सबसे प्रसिद्ध किताबों में से एक थी “बाणभट्ट की...

नमक स्वादानुसार : निखिल सचान

ऐसा आमतौर पर एबस्ट्रेक्ट पेंटिंग की गैलेरी में होता है। कई बार आप घूर कर सामने टंगी कलाकृति को देखते हैं, कुछ सोचते हैं,...

महाभोज : मन्नू भंडारी

थोड़े पुराने ज़माने में, यानि कुछ दस साल पहले लेखक होना कठिन था। अपने रोजमर्रा के काम के बीच जब आप कुछ लिखते भी...

कोहबर की शर्त

“ये कोहबर का द्वार है पहुना, इसे ऐसे नहीं लांघने पाओगे ! यहाँ दुआर पढ़ना पड़ता है |” ये संवाद ‘कोहबर की शर्त’ नाम...

आज भी खरे हैं तालाब

पुराने ज़माने की बात है | कुडन, बुडन, सरमन और कौराई चार भाई थे | जैसा कि आम तौर पर उस ज़माने में होता...

भगवानदास मोरवाल की “हलाला”

हो सकता है “काशी का अस्सी” पढने वालों ने भी यही सवाल सोचा हो | भाषा की शुचिता, या इलाके की मिटटी की खुशबु...

वामपंथ का काला इतिहास

दुनियां के जघन्यतम अपराध क्रांतियों की आड़ लेकर हुए हैं | विश्व युद्धों की जड़ में कहीं ना कहीं क्रांति की आड़ में छुपे...

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