भौतिकी यानि फिजिक्स का इस्तेमाल कई जगहों पर होता है। ज्यादातर लोग इसे सीखने-सिखाने के आसान तरीके भूल जाते हैं और न्युमेरिकल्स (मैथ्स) से भरा कोई बोरिंग और कठिन विषय मान लेते हैं। बच्चों को फिजिक्स की कुछ चीज़ें सिखाने के लिए आप बाहुबली फिल्म के रोचक दृश्य भी इस्तेमाल कर सकते हैं। फलकर्म (fulcurm), लीवर (lever), पुल्ली (pulley) और प्रोजेक्टाइल मोशन (projectile motion) जैसी चीज़ें सिखाने का आसान तरीका है बाहुबली की शतघ्नी।

 

शतघ्नी नाम से आप परिचित नहीं हैं तो बता दें कि इसे आप turbuchet और catapult जैसे नामों से जानते हैं। मोटे तौर पर इसमें एक लम्बा से बांस या लकड़ी का टुकड़ा होता है। इस लम्बे से लकड़ी के टुकड़े के एक तरफ भारी वजन बंधा होता है और दूसरी तरफ फेंका जाने वाला कम वजन का एक पत्थर होता है। ये एक लीवर की तरह काम करेगा। बीच की जगह में कहीं एक फलकर्म होता है। जैसे आपके दरवाजा खोलने या बंद करने में होता है यहाँ भी बिलकुल वैसा ही होता है। जैसे हैंडल के पास से खींचकर या धकेल कर दरवाजा खोलने बंद करने में कम ताकत लगती है और जैसे जैसे आप हैंडल से दूर दरवाजा जहाँ से जुड़ा है उस तरफ बढ़ते हैं तो ज्यादा ताकत लगानी पड़ती है वैसा ही होगा।

 

फलक्रम यानि आलम्ब का सिद्धांत इसी तरह काम करता है और इस तरीके से पत्थर, भाले या दुसरे प्रक्षेपण बिना बारूद के किये जा सकते हैं। पुराने दौर में जब तोपें नहीं होती थी तो किले पर हमले के प्रतिरोध में ये हथियार इस्तेमाल होते थे। ध्यान रखिये कि शतघ्नी आक्रामक नहीं, प्रतिरक्षात्मक हथियार है। इसी वजह से बाहुबली फिल्म का कटप्पा युद्ध शुरू होने से पहले ही बाहुबली के पास परेशान सा खड़ा होता है। वो जानना चाहता था कि उन्हें जो शतघ्नी जैसे हथियार दिए गए हैं उनसे भला कालिकेयों की सेना पर आक्रमण कैसे किया जाएगा ? मामूली से फेरबदल से बाहुबली ने इसे आक्रमक हथियार में बदल दिया था।

पुराने दौर का ये ट्रेब्युचेट यानि शतघ्नी उन हथियारों में से है जो हड़प्पा तक में पाए गए हैं। इसके कई प्रारूप होते हैं, जिनसे मिलते जुलते कुछ हड़प्पा में भी मिले थे। हड़प्पा में आक्रमक हथियार ना के बराबर मिले हैं, लेकिन रक्षात्मक हथियार उनके पास भी थे। हाल के दौर में देखें तो शतघ्नी का इस्तेमाल 2013 के सीरिया के गृह युद्ध में सरकारी फौजों पर पत्थर फेंकने में हो चुका है, उक्रेन में इसी काम के लिए ये 2014 में इस्तेमाल हुआ। इसे खोलना और बनना आसान होता है, मतलब खोल कर टुकड़ों में रखा जाता है और जरूरत के वक्त इसे जोड़कर खड़ा करने में मुश्किल से पांच मिनट लगेंगे, इसलिए भीड़ पर एक टोकरी पत्थर एक ही बार में बरसा देने के लिए इसका जमकर इस्तेमाल होता है।

जो तस्वीरों में दिख रहा है वो बच्चों के लिए आइसक्रीम स्टिक, पेन और रबर से बना है। इस से ज्यादा से ज्यादा चने-पॉपकॉर्न, मटर वगैरह बरसा पायेंगे। इसका इस्तेमाल अब हथियार की तरह नहीं होता। पांच मिनट में बनकर तैयार हो जाने और भीड़ पर पत्थरों की बारिश कर देने की वजह से किसी महागुन की छत पर होता तो अच्छा होता जैसा कुछ मत सोचिये। ये भौतिकी-फिजिक्स के बारे में है, भीड़ के हमले का प्रतिरोध करने का कोई रक्षात्मक हथियार बनाना नहीं सिखाया है।

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आनंद मार्केट रिसर्च में काम करते हैं, और शब्दों में रूचि रखते हैं। किताबों के अपने शौक में वो खूब सारी किताबें पढ़ते हैं। लोगों से बातचीत, समाजशास्त्र, पौराणिक कथाओं, इतिहास से वो अक्सर रोचक कहानियां ढूंढ लाते हैं।

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