असम को भी कई बार लोग बिलकुल पहाड़ी क्षेत्र समझ लेते हैं, जब की ऐसा नहीं है, ये एक अर्ध सत्य है। असलियत ये है कि असम में पहाड़ भी हैं, मैदान भी हैं। इस भ्रम को दूर करने के लिए हमे असम की जियोग्राफी समझनी पड़ेगी क्योंकि इतिहास और भूगोल के अध्ययन के बिना किसी भी राज्य की संस्कृति और कला का विश्लेष्ण नही किया जा सकता। ओके ! लेट मी हेल्प यू…

 

वास्तव में असोम एक घाटी क्षेत्र है, जो भूटान , अरुणाचल, नागालैंड, मणिपुर, मेघालय आदि की पहाड़ियों से घिरी हुई है। असम घाटी का निर्माण ब्रह्मपुत्रो द्वारा किया गया है। ब्रह्मोपुत्रो असोम के बीचोबीच से बहती है। वास्तव में उसके दोनों तटों पर ही असम का फैलाव है। भारत में हिमालय पश्चिम में कश्मीर से शुरू होकर पूर्व में अरुणाचल तक सीधा फैला हुआ है। लेकिन नामचा बरुआ नामक स्थान से अचानक हिमालय का विस्तार मुड़कर दक्षिण की तरफ हो जाता है। जियोग्राफी में इसे “सिनटेक्सियल बेन्डिंग “कहते हैं। जो आगे पताकाई बूम, मणिपुर हिल्स, नागा हिल्स, बरेल हिल्स और लुशाई, त्रिपुरा हिल्स तक है। आगे मेघालय की गारो खासी और जयनतिया पहाड़िया असम को घेरते हैं।

 

ब्रह्मपुत्रो चीन के मानसरोवर से निकलती है और हिमालय के समांतर प्रवाहित होती है। नामचा बरुआ में ये नदी अचानक से भारत के अरुणाचल प्रदेश में दिहंग गार्ज बनाते हुए मुड जाती है। आगे सदिया नामक स्थान से असम में प्रवेश करती है। ब्रह्मोपुत्रो असम में सदिया से धुबरी तक एक “रैंप घाटी” में बहती है। जिसके एक साइड में हिमालय और दूसरी ओर शिलोंग प्लेटू है। सदिया में भारत के सबसे लम्बे पुल का निर्माण किया जा रहा है। सदिया मेरे तिनसुकिया जिले में हैं। आप समझ सकते हैं की ये लेख भारत के सबसे पूर्वी भाग से आप तक पहुँचता है। खैर!

 

पहाड़ों से घिरे इस क्षेत्र को ब्रह्मुत्रो नदी बीचो बीच काटती है और इसके द्वारा लायी गयी मिटटी से एक घाटी का विकास हुआ। यही क्षेत्र असम है। असल में कहें तो असम ब्रह्मपुत्रो के दोनों किनारों पर बसा हुआ है। इसलिए असोम की संस्कृति, कला, सभ्यता का विकास इस नदी के कारण ही हुआ। ब्रह्मपुत्र असम की आर्थिकी की जीवन रेखा है।

 

ये ज्योग्राफिकली एक मैदानी क्षेत्र है जिसमे छोटे छोटे कम ऊँचाई के पहाड़ पाए जाते हैं। ये पर्वत असल में आस पास की पहाड़ियों के एक्सटेंशन हैं। स्थानीय लोंग इसे “अपर असम और लोअर असोम” के रूप में जानते हैं। अपर असम अपेक्षाकृत पहाड़ी क्षेत्र है और लोअर असम मैदानी। चाय के बागान अपर असम में ज्यादा पाए जाते हैं। क्योकि ये भाग अपेक्षाकृत पहाड़ी और ऊँचा होने कारण यहाँ पानी का जामव नहीं होता जो चाय की कृषि के लिए उपयोगी है। भारत के ज्योग्राफिकल डिस्ट्रीब्यूशन में असम घाटी से लेकर गंगा और सिन्धु घाटी के बीच के मैदानी क्षेत्र को भारत का “उत्तर का मैदानी क्षेत्र” कहा जाता है। तीन ओर से पहाड़ियों से घिरे होने के कारण यहाँ बारिश बहुत होती है।

 

असम में एक मात्र हिल स्टेशन हाफलोंग है। उम्मीद है आप लोग असम के भौगोलिक स्थिति से परिचित हो गए होंगे। कोशिश करें की अपने अपने राज्यों के बारे में भी ऐसी जानकारियां दें जो आमतौर पर लोगों को न पता हों। या लोंगो में मन में आपके राज्य को लेकर गलत जानकारी प्रचलन में हो।

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पेशे से शिक्षक गीताली, घूमने की शौक़ीन हैं। वो अक्सर अपनी कार में लम्बे सफ़र पर पायी जाती हैं। गणित में स्नातकोत्तर गीताली असमिया, बंगाल, अंग्रेजी सहित कई भाषाएँ बोलती हैं। अभी हाल में उन्होंने हिंदी भी सीख ली है। हालाँकि उनका अभ्यास भारतीय शास्त्रीय संगीत का है, मगर अपने खाली वक्त में वो हर किस्म का संगीत सुनती हैं। उनका लिखा फेसबुक पर ख़ासा पसंद किया जाता है।

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