आज से ठीक दो वर्ष पूर्व 27 जुलाई 2015 के दिन शाम 6.30 बजे के आसपास वे आईआईएम शिलॉंग में व्याख्यान देते हुए अकस्मात गिरे और शरीर छोड़ कर उठ गए। न कोई रोग, न व्याधि, उनके शरीर ने कुछ नहीं भोगा, बस गिरे और उठ कर तेज़ी से किसी दूसरे ग्रह के लिए चल दिए। हम लोग भारत की प्रगति के बारे में प्रायः धार्मिक, सांस्कृतिक, आर्थिक, सामाजिक एवं राजनैतिक विचार रखते हैं। स्वतंत्र भारत में ऐसे बहुत कम लोग हुए हैं जिनके चिंतन में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और वैज्ञानिक कार्यक्षेत्र में राष्ट्रीय चिंतन दोनों ही सहज भाव से रहा। भारत में आने वाली पीढ़ियाँ जब डॉ कलाम की लिखी पुस्तकें पढ़ेंगी तो उन्हें आश्चर्य होगा कि हाड़ मांस का बना एक ऐसा व्यक्ति भी था जो उठते, बैठते, खाते पीते, सोते जागते निरंतर यही सोचता था कि भारत को वैज्ञानिक रूप से विश्व में अग्रणी कैसे बनाएं।

 

डॉ कलाम ने शरीर त्यागने से पूर्व एक पुस्तक लिखी थी Advantage India: From challenge to Opportunity. यह उनकी अंतिम पुस्तक है। इसीलिए कवर पर लिखा है: His last bequest to the Nation. इस पुस्तक में उन्होंने राष्ट्रीय उत्पादकता, मानव संसाधन के विकास, स्वास्थ्य, डिजिटल इंडिया, इक्कीसवीं शताब्दी में शासन व्यवस्था, जल संसाधन की उपलब्धता, और पर्यावरण सम्बंधी विषयों पर सरल उदाहरणों सहित प्रकाश डाला है। उत्पादन के साथ नवोन्मेष किस प्रकार हो सकता है इसके लिए उन्होंने अग्नि मिसाइल के निर्माणकाल के कुछ उदाहरण दिए हैं।

 

1987 तक डॉ कलाम की टीम ने अग्नि की डिज़ाइन में उल्लेखनीय सफलता अर्जित कर ली थी। अग्नि हाइपरसोनिक अर्थात् 6800 किमी प्रति घण्टा से अधिक रफ्तार से उड़ने वाली मिसाइल है। लम्बी दूरी की मिसाइल पर पड़ने वाला हवा का प्रभाव उसकी दिशा बदल सकता है और सतह पर घर्षण मिसाइल को लगभग 4000℃ पर गर्म भी कर सकता है इसलिए अग्नि के लघु मॉडल का एक सिम्युलेटर पर परीक्षण करना आवश्यक था। सिम्युलेटर का अर्थ है प्रयोगशाला में एक कृत्रिम वातावरण का निर्माण करना जहाँ वायु, ध्वनि की गति से कम (sub sonic), अधिक (supersonic) अथवा पाँच गुना (hypersonic) तीव्रता से बह रही हो और उसके बीच से परीक्षण किये जाने वाली वस्तु को गुजारा जाये। इसे विंड टनेल यानि वायु की सुरंग कहा जाता है। उस समय भारत में हाइपरसोनिक विंड टनेल सिम्युलेशन की व्यवस्था कहीं नहीं थी और अमरीका हमें यह सुविधा देने वाला नहीं था। इसलिए निर्णय लिया गया कि विंड टनेल का परीक्षण जर्मनी में किया जाये। तत्कालीन जर्मनी पूर्व और पश्चिम में विभाजित था। पूर्वी जर्मनी रूस के हाथों में था और पश्चिमी नाटो व अमरीका के अधीन था। पश्चिमी जर्मनी के स्टट्गार्ट नगर में विंड टनेल सिमुलेशन की प्रयोगशाला में हमें अग्नि मिसाइल के 20 किग्रा मॉडल का परीक्षण करने की अनुमति मिली। जिस दिन परीक्षण होना था उस दिन सभी कागजी कार्यवाही निबटा कर तैयारी पूरी कर ली गयी थी। तीन घण्टे रह गए थे तभी समाचार मिला कि सात देशों ने (जिनमें पश्चिमी जर्मनी भी सम्मिलित था) Missile Technology Control Regime यानि MTCR पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। यह सन्धि 500 किग्रा पेलोड को 300 किमी से अधिक दूरी तक ले जाने वाले सभी प्रकार के तकनीकी हस्तांतरण पर प्रतिबंध लगाती है। अग्नि मिसाइल इस सीमा से कहीं अधिक प्रभाव वाली तकनीक थी। पश्चिमी जर्मनी के MTCR पर हस्ताक्षर करते ही सन्धि के नियम लागू हो गए परिणामस्वरूप उन्होंने स्टट्गार्ट की प्रयोगशाला में अग्नि के मॉडल पर परीक्षण की सुविधा देने से मना कर दिया। भारतीय वैज्ञानिकों का सात सदस्यीय दल लौट आया। परन्तु डॉ कलाम के नेतृत्व में हम निराश नहीं हुए थे।

 

जब वायु तीव्र गति से प्रवाहित होती है तो उसके प्रभावों के अध्ययन को एयरोडायनामिक्स कहा जाता है। किंतु वायु स्वयं एक फ्लुइड है। अंग्रेजी में फ्लुइड अर्थात् फ्लो यानि ऐसी वस्तु जो बहे। जल भी फ्लुइड ही है। ऐसे में गतिमान फ्लुइड को कम्प्यूटर की सहायता से अध्ययन करने की विद्या को Computational Fluid Dynamics (CFD) कहा जाता है। 1987 में इस विषय पर भारत में प्रारंभिक स्तर पर ही शोधकार्य होता था। उस जमाने में भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc बेंगलुरु) में CFD पर शोध करने के लिए प्रो० एस० आर० देशपांडे जाने जाते थे। अब जो परीक्षण का कार्य सिम्युलेटर पर सम्भव नहीं हो सका था उसे कम्प्यूटर पर कृत्रिम रूप से करना था। इसके लिए प्रो देशपांडे के साथ डिफेंस रिसर्च एन्ड डेवलपमेंट लेबोरेटरी (DRDL) के दस वैज्ञानिकों की टीम को लगाया गया। यहाँ एक और समस्या मुँह बाए खड़ी हो गयी। अग्नि मिसाइल के लिए CFD पर कार्य करने के लिए तीव्र गति से गणना करने वाला कम्प्यूटर चाहिये था। उस समय न तो भारत में मेनफ़्रेम कम्प्यूटर हुआ करते थे न कहीं से मंगाने का समय था। MTCR सन्धि के चलते कोई अन्य राष्ट्र हमें तीव्र प्रोसेसिंग करने वाला कम्प्यूटर देता भी नहीं।

 

तब प्रो देशपांडे और DRDL के वैज्ञानिकों ने ‘kinetic energy splitting methodology’ तकनीक का निर्माण किया जिससे एल्गोरिथ्म को कई हिस्सों में बाँट कर कम्प्यूटर पर लगने वाले वास्तविक समय के दसवें हिस्से में ही कार्य पूर्ण कर लिया गया। जितना मुझे समझ में आता है उसके अनुसार कम्प्यूटर विज्ञान में किसी समस्या को सुलझाने के लिए चरणबद्ध प्रक्रिया को लिखना एल्गोरिथ्म कहलाता है। अत्यधिक तीव्र गति पर मिसाइल पर हवा का प्रभाव किस प्रकार पड़ेगा इसका CFD आधारित एल्गोरिथ्म कई हिस्सों में विभाजित कर लिखा गया होगा जिससे समय की बचत हुई होगी। वैज्ञानिक इतना करने के बाद भी 100% आश्वस्त नहीं थे कि जो आंकड़े उन्हें मिलेंगे वे सटीक होंगे या नहीं। इसके लिए पूर्व में इकट्ठे किये गए आंकड़ों से मिलान करना आवश्यक था। अग्नि की तुलना में कम दूरी की मिसाइल पृथ्वी के वास्तविक परीक्षण के आंकड़े उपलब्ध थे। पृथ्वी को CFD आधारित एल्गोरिथ्म पर रख कर कम्प्यूटर पर पुनः परीक्षण किया गया। उन आंकड़ों से अग्नि के कम्प्यूटर आधारित आकंड़ों का मिलान किया गया। वैज्ञानिक दल की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा जब उन्हें सभी आंकड़े मिलते जुलते दिखाई दिए। इस प्रकार अग्नि ने 22 मई 1989 को 1000 किग्रा पेलोड को 800 किमी दूर सफलता पूर्वक प्रक्षेपित किया। डॉ कलाम लिखते हैं कि भारत सम्भवतः प्रथम देश था जिसने बिना विंड टनेल परीक्षणों से गुजारे और बिना सुपरकम्प्यूटिंग की सहायता के लम्बी दूरी की मिसाइल का परीक्षण किया। यही नहीं यह अनुभव आगे चलकर परम सुपरकम्प्यूटर के निर्माण के लिए प्रेरणास्रोत बना।

 

अपनी अंतिम पुस्तक में डॉ कलाम एक स्थान पर लिखते हैं: “Every nation has a character, a unique attitude which governs how it deploys and develops its resources for its economic wealth. This unique attitude determines how a nation treats its natural wealth, how it skills its human resources, how it behaves when pushed into a corner by technological or economic denial by others. We will call this Production Attitude of a Nation and it is often the critical differentiator which determines the wealth and productivity of its people.”

 

डॉ कलाम के इन शब्दों में वह शक्ति निहित है जिससे भारत जैसा राष्ट्र उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा सकता है। इसीलिए तो वे कहते थे कि As a young citizen of India armed with Science and Technology, I believe that small aim is a crime.

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