सुबह से एक मजेदार किस्सा इधर उधर से सुनने में आ रहा है.. तो हुआ यूँ की बिल गेट्स ने माइक्रोसॉफ्ट के यूरोपीय प्रभार के लिए एक नया चेयरमैन नियुक्त करने की ठानी | इंटरव्यू का दिन और वक़्त अखबारों में छपवा दिया | नियत समय पर कुछ लाख डेढ़ लाख लोग स्टेडियम में जमा हो गए..
बिल गेट्स ने माइक संभाला और कहा “good morning !! जिन्हें JAVA न आता हो वो जा सकते हैं..” कुछ 50 हज़ार लोग बाहर हो गए.. प्रताप ने सोचा JAVA आता तो नहीं मगर बैठे रहने में क्या जाता है..
बिल गेट्स ने दूसरा दाँव लगाया “जिन्होंने मैनेजमेंट की डिग्री / डिप्लोमा न ली हो वो भी जा सकते हैं..” कुछ 25-30 हज़ार लोग और निकल गए.. मगर प्रताप ने फिर सोचा यार स्कूल तो 15 की उम्र में छोड़ के निकले थे मगर बैठे रहने में क्या जाता है…
बिल गेट्स ने तीसरा सवाल किया “जिन्होंने बड़ी टीम मैनेज नहीं की वो भी जाएँ…” फिर से 50 हज़ार लोग उठ के चले गए.. प्रताप ने फिर सोचा, यार खुद के अलावा तो किसी को मैनेज नहीं किया मगर बैठे रहने में क्या जाता है..
बिल गेट्स ने कहा “जिन्हें जापानी भाषा न आती हो वो भी जा सकते हैं…” 25-30 हज़ार लोग फिर निकल गए.. प्रताप ने फिर सोचा अबे आती तो अंग्रेजी भी ठीक से नहीं.. मगर बैठे रहने में क्या जाता है..
अब गिनती के 4-5 सौ लोग ही बचे थे..
बिल गेट्स ने फिर पुछा “जिन्हें यूरोप की हिस्ट्री / जियोग्राफी की अच्छी जानकारी न हो वो भी जाएँ…” अब लगभग सारे ही लोग निकल गए.. सिर्फ प्रताप और एक और आदमी बैठा रहा.. प्रताप ने सोचा अब देखा जाए आगे क्या होता है.. इतने में बिल गेट्स स्टेज से उतर आये.. और दोनों से हाथ मिलाया फिर कहा “भाई आप ही दो लोग हैं जो बाकि सारी शर्तें भी पूरी करते हैं और जापानी भी जानते हैं तो ऐसा करें आपस में जापानी में बात कर के दिखाएँ..”
प्रताब साहब दुसरे उम्मीदवार की तरफ मुड़े और कहा “कौन जिला घर पड़ी हो??”
जवाब आया “छपरा… और तोहार??”

(8 August, 2014)
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आनंद मार्केट रिसर्च में काम करते हैं, और शब्दों में रूचि रखते हैं। किताबों के अपने शौक में वो खूब सारी किताबें पढ़ते हैं। लोगों से बातचीत, समाजशास्त्र, पौराणिक कथाओं, इतिहास से वो अक्सर रोचक कहानियां ढूंढ लाते हैं।

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