घर पे होने और सफ़र पे होने में बड़ा फ़र्क होता है | घर में महल बहुत safe सा होता है, आपको अपने आस पास नज़र रखने की जरुरत ही नहीं होती | सफ़र अगर कहीं भारतीय रेल में कर रहे हों तो फिर तो अपने आस पास हो रही बातचीत का भी हर शब्द याद रहता है | सुबह सुबह जब अंधविश्वासों की चर्चा शुरू हुई तो यही सफ़र याद आया | एक पुराने मित्र की शादी में शिरकत करने के लिए हम कुछ दोस्त, कुछ दिन पहले पड़ोस के एक शहर रवाना हुए |
ट्रेन पटना से कुछ ही आगे निकली थी की पहला आश्चर्य हमारे सामने आया | हम तीन दोस्तों के साथ ही एक ही परिवार के चार पांच लोग बैठे थे जो अंग्रेजी दवाओं के साइड इफ़ेक्ट पर चर्चा कर रहे थे | अचानक मेरा ध्यान उस खबर पर चला गया जिसे पढ़ कर वो चर्चा कर रहे थे | अखबार उर्दू था तो बाकि दोनों दोस्तों को समझ नहीं आया था, और मेरी हंसी रोके न रुके | हम मोबाइल देख देख कर हँसे जाएँ | आखिर हमने बाकि दोनों को मैसेज में भेजा की खबर में लिखा क्या था |
खबर थी की कैसे एक समुदाय विशेष को नपुंसक बनाने की साज़िश रची जा रही है | जी हाँ हैरान न हों ! एक समुदाय के कई लोग मानते हैं की एक यहूदी वैज्ञानिक ने जो ड्राप बनाया है उस से एक समुदाय विशेष के कमर के नीचे का पूरा तंत्र प्रभावित हो जाता है और आगे चलकर इस समुदाय के पुरुष बच्चे पैदा करने में समर्थ नहीं होते | इसे पोलियो ड्राप कहते हैं, कई उर्दू अखबार के एडिटोरियल वाले हिस्से अगर आप देखेंगे तो ऐसी कई conspiracy theories आपको मिल जाएँगी |
जिस शहर पहुंचे वहां कई पुराने मित्र हैं | क्या है की हर शहर से पढ़ने बिहार के लोग पटना आ जाते हैं 10वीं के बाद इसलिए कई शहरों के लोगों से जान पहचान होती है | ऐसे कई पुराने मित्रों में से सिर्फ एक मित्र महिला है जिस से अभी भी अक्सर बात हो जाया करती है | जब उनसे मिलने पहुंचे तो पता चला शाम की किसी दावत में जाने के लिए उन्हें एक गिफ्ट लेना था | हमने फ़ौरन ड्राईवर की ड्यूटी संभाली | मित्र और उनकी भाभी ने घर वापिस पहुँचते ही हमारी तारीफों के पुल बांधने शुरू किये | भाभी तो पहली बार मिली थी हो सकता हो की औपचारिकता निभा रही हैं इसलिए हमने ध्यान नहीं दिया | जब हमरी मित्र भी उनका साथ देने में जुट गईं तो हमने पुछा ये मामला क्या है ? आज कौन सा अनोखा काम कर दिया हमने |
पहला जवाब भाभी का आया, “क्यों घर से निकलते ही हम लोगों के लिए कार का दरवाज़ा नहीं खोला था ? फिर हम लोगों को बिठा कर खुद बैठे ड्राइविंग सीट पर ! कितनी तमीज़ से तो पेश आये !” अब मेरे लिए तो ये रोज़ की बात है, लेकिन किस्सा इतने पे ही नहीं रुका | मित्र महोदया ने बताया तुम पैदाल चलते वक्त साइड बदल के हर बार गाड़ी की तरफ आ जाते हो और हमें किनारे रखते हो | हमने दिमाग लगाने की कोशिश की मगर ऐसा करते हैं हम, या नहीं ये याद नहीं आया | इतने में भाभी ने तीसरा तीर भी दागा, एक बार भी परदे के लिए नहीं टोका ! अब नकाब, घूंघट, बुर्के से तो मेरी एलर्जी है भाई ! हम तो जीन्स के पक्षधर ठहरे !
भारतीय समाज का एक बड़ा सा हिस्सा कैसे पूर्वाग्रहों से घिरा है और कैसे कैसे अंधविश्वासों में यकीन करता है ये उस समुदाय विशेष की घनी आबादी वाले इलाके में जाकर समझ आया | पर्दा है, भेदभाव है, औरत के पढ़ने पर बंदिशें हैं, सवाल करने पर रोक है, विज्ञान को गुनाह आज भी समझा जाता है, परिवार नियोजन धर्म विरुद्ध हो जाता है, कहीं जो लड़की किताब क्या डायरी भी लिख दे तो क़त्ल ही हो जाए |
और ऐसे समाज में सबसे नया वाला Urban Legend है “लव जिहाद” का क़िस्सा | अब ये होता है या नहीं होता इसपे बहस नहीं करेंगे लेकिन इसके विरोधी सबसे ज्यादा फेसबुक पर दिखते हैं | मेरा मानना है की अगर ये सारे कट्टर हिन्दू शेर थोड़ी कोशिश करें तो reverse love जिहाद ज्यादा मुश्किल नहीं होगा | आपका बदला भी पूरा हो जायेगा, उन्हें बहुत सी आज़ादी भी नसीब हो जाएगी | आप कितने स्मार्ट हैं इस से कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा ! एक बार कोशिश कर के देखिये बहुत आसान होगा | आप जितनी आज़ादी को लड़कियों के लिए नार्मल समझते हैं उतने पर उन्हें हवा में उड़ने जैसी फीलिंग आएगी | कुछ पढ़ने का मौका मिल जायेगा कुछ को, थोड़ी दुनियाँ घर की चारदीवारी के बाहर की भी देख लें शायद |
सुना है काफी पुन्य भी मिलता है इस से… मगर वो हमें पक्का नहीं पता, मिलता है क्या ??
(March 17, 2015)
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आनंद मार्केट रिसर्च में काम करते हैं, और शब्दों में रूचि रखते हैं। किताबों के अपने शौक में वो खूब सारी किताबें पढ़ते हैं। लोगों से बातचीत, समाजशास्त्र, पौराणिक कथाओं, इतिहास से वो अक्सर रोचक कहानियां ढूंढ लाते हैं।

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