चिड़िया और मेंढक की एक कहानी है | किस्से में एक ही पेड़ की जड़ में रहता था मेंढक और ऊपर की डाल पर चिड़िया ने घोंसला बना रखा था | सामने ही तालाब था तो दोनों को खाने पीने की भी दिक्कत नहीं होती थी वहां | एक दिन कहीं से घूमता टहलता एक नाग वहां से गुजरा | जब उसने देखा की यहाँ तालाब भी है और खाने के लिए शिकार भी तो वो बड़ा खुश हुआ | उसने भी वहीँ पास में अड्डा जमा लिया |
किसी दिन अब ये नाग मेंढक के बच्चे खा जाता तो कभी चिड़िया के अंडे खा जाता | दोनों पड़ोसी मेंढक और चिड़िया, दुखी हो गए | आखिर मेंढक ने सोचा की पड़ोस के गाँव से नेवले को बुला लाया जाए | चिड़िया ने इसका विरोध किया, कहा की सांप से तो नेवला बचा लेगा, नेवले से हमें कौन बचाएगा ? कुछ दिन तो ऐसा चला और मेंढक बर्दास्त किये रहा, लेकिन अगली बार जब मेंढक के बच्चों को नाग खा गया तो बिना चिड़िया को बताये वो नेवले को बुला लाया |
नेवला झाड़ियों में छुप कर बैठा और जैसे ही नाग बाहर आया उसपर टूट पड़ा | नाग बहादुरी से लड़ा, लेकिन नेवले के आगे कितनी देर टिकता ? मारा गया बेचारा | उसे खाने के बाद नेवला वहीँ तालाब के पास रुक गया | सांप तो एक दो दिन में ख़त्म हो गया तो उसके बाद उसने कभी मेंढक कभी चिड़िया के बच्चों को खाना शुरू कर दिया ! चिड़िया ने मेंढक से कहा, मैंने तो तुम्हें पहले ही समझाया था | और फिर वो उड़ कर दूसरी जगह घोंसला बनाने चली गई | मेंढक बेचारा उड़ तो सकता नहीं था, पानी से ज्यादा दूर भी नहीं जा सकता था | थोड़े दिन बाद वो भी नेवले का निवाला बना |
अब बीजेपी तो दुसरे राज्यों में पांव ज़माने लगी है | बेचारे सात सीट वाले कांग्रेसी कहाँ जायेंगे ? सारे पुराने कांग्रेसियों ने केजरीवाल को अपने विरोधियों को कुचलते देख लिया होगा | जन समर्थन भी उसका देख ही चुके हैं | इन्दिरा याद तो आ ही गई होगी ?
अब इटली तो उड़ कर भाग नहीं सकते | झेलो !!
(March 05, 2015)
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आनंद मार्केट रिसर्च में काम करते हैं, और शब्दों में रूचि रखते हैं। किताबों के अपने शौक में वो खूब सारी किताबें पढ़ते हैं। लोगों से बातचीत, समाजशास्त्र, पौराणिक कथाओं, इतिहास से वो अक्सर रोचक कहानियां ढूंढ लाते हैं।

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