एक क्रिसमस ट्री कहलाने वाले पेड़ को सजाया जाना, तोहफे लेना और देना, और एक लाल कपडे लम्बी दाढ़ी वाले सैंटा क्लॉज़ का आना ! ज्यादातर लोगों के लिए यही क्रिसमस है । ईसाई लोगों के लिए इस त्यौहार का अपना अलग महत्व भी है । ये ईसा मसीह का जन्मदिन मानाने का त्यौहार है । माना जाने लगा है कि इसी दिन उनका जन्म हुआ था ।

लेकिन शायद आपको ये पता ना हो ये सारी परम्पराएँ क्रिसमस के साथ हाल में ही जुडी हैं । और तो और ईसाई धर्म के शुरुआती सालों में तो कोई क्रिसमस मनाया ही नहीं जाता था । पूरी बाइबिल में कहीं भी इस त्यौहार का जिक्र नहीं आता । शुरुआती दौर के ईसाई इस बात पर एकमत नहीं थे कि ईसा का जन्म हुआ किस दिन था । कोई 14 दिसम्बर कहता, कोई 10 जून तो कोई 2 फ़रवरी को उनका जन्मदिन मानता था । तीसरी शताब्दी में जाकर 25 दिसम्बर को ईसा का जन्मदिन मनाना शुरू किया गया । कई पगान (Pagan, यानि नीच किस्म के धर्म), रोम में इसी दिन के आस पास Saturnalia त्यौहार मानते थे, जो की सैटर्न यानि शनि देव के कोप से बचने के लिए घरों के अंदर रहकर छुट्टी मनाने का मौका था । स्कैंडेनेविया में नॉर्स कबीले वाले इसी दिन के आस पास यानि 21 दिसंबर को यूल (Yule) नाम का त्यौहार मनाते थे । Egypt में ये त्यौहार 432 AD तक पहुँच गया था, क्रिसमस को यूरोप पहुँचते पहुँचते दो सौ साल और लगे । छठी शताब्दी के अंत तक ये यूरोप में भी मनाया जाने लगा था ।

आज भी देखेंगे तो ग्रीक और रुसी ऑर्थोडॉक्स (orthodox) चर्च क्रिसमस को 25 तारीख के 13 दिन बाद मनाते हैं । इसे एपीफेनी या तीन राजाओं का दिन (Epiphany or Three Kings Day) कहते हैं और उनका मानना है की तीन ज्ञानी लोगों ने इसी दिन ईसा मसीह को जानवरो के बाड़े में एक नांद में ढूंढा था ।

शुद्धतावादी ईसाईयों को हमेशा ही क्रिसमस के मनाये जाने पर आपत्ति रही है । 1645 में जब Oliver Cromwell और उनकी शुद्धतावादी सेना ने इंग्लैंड पर कब्ज़ा किया तो सबसे पहले उन्होंने क्रिसमस पर पाबन्दी लगा दी । थोड़े समय बाद Charles II के आने पर इसे जनता की मांग पर फिर से शुरू किया गया । 1620 में जब क्रॉमवेल से भी ज्यादा शुद्धतावादी अंग्रेज़, अमेरिका पहुंचे तो उन्होंने भी सबसे पहले क्रिसमस पर ही पाबन्दी लगानी शुरू की । बॉस्टन में तो 1659 से लेकर 1681 तक क्रिसमस मनाने पर क़ानूनी पाबन्दी थी, इसे मनाने वालों पर 5 शिलिंग का जुर्माना होता था जो कि उस ज़माने के हिसाब से बहुत ज्यादा होता है । अमेरिकी क्रांति के बाद अंग्रेजी तौर तरीकों को बुरा माना जाने लगा था । 26 जून 1870 को अमेरिका में पहली बार क्रिसमस को फ़ेडरल हॉलिडे घोषित किया गया ।

अमेरिका में 1800 का शुरुआती हिस्सा वो दौर था जब बेरोज़गारी काफी बढ़ी हुई थी और अमीरों गरीबों के बीच खाई काफी बढ़ गई थी । दंगे अक्सर भड़क जाते थे, 1828 में न्यू यॉर्क की सिटी कॉउंसिल ने शहर के पहले पुलिस बल का गठन एक क्रिसमस दंगे के बाद ऐसी ही घटनाओं से निपटने के लिए किया गया था । ऐसे मुश्किल समय के दौरान लेखकों ने भी अपनी जिम्मेदारी निभाई । फिक्शन (fiction) लेखक Washington Irving ने 1819 में एक किताब लिखी, The Sketchbook of Geoffrey Crayon, ये एक बड़े अंग्रेज़ों के महल में होने वाली क्रिसमस दावतों की कहानियां है । इसमें एक सामंत है जो किसानों को अपने घर दावत के लिए आमंत्रित करता है, उस समय के अमेरिकी समाज के ठीक उलट सामंतों और किसानों को इन कहानियों में आपस में घुलता मिलता दिखाया गया ।

ये वो दौर था जब Spare the rod, spoil the child, जैसी कहावतें प्रचलन में थीं । लोगों का मानना था कि बिना पिटाई के बच्चे बिगड़ जाते हैं । इसी माहौल में विख्यात लेखक Charles Dickens ने अपनी प्रसिद्द किताब A Christmas Carol लिखी । ये किताब दान, उपहारों की महत्ता दिखाती है । इस ज़माने में बच्चों को खिलौने देना, उन्हें बिगाड़ना माना जाता था । किताब के आने के बाद माँ बाप बिना किसी सामाजिक दबाव या ग्लानि महसूस किये बिना क्रिसमस के अवसर पर अपने बच्चों को भी तोहफे देने लगे ।

जैसे जैसे अमेरिकी लोगों को क्रिसमस एक पारिवारिक छुट्टी का अच्छा मौका लगने लगा वैसे वैसे इस त्यौहार में कई नए पुराने रिवाज़ भी जोड़े जाने लगे । पिंसेटा (Poinsettia) का लाल और हरा पौधा Joel R. Poinsett, मेक्सिको से अमेरिका ले आये थे । 1828 के दौर में वो मेक्सिको में अमेरिकी मंत्री थे । निर्माण कार्य का काम करने वाले मजदूरों ने 1931 में रॉकफ़ेलर सेंटर में क्रिस्टमस ट्री की परंपरा शुरू की । जर्मनी के प्रिंस अल्बर्ट की शादी जब इंग्लैंड की विक्टोरिया से हुई तो प्रिंस अपने साथ पेड़ों को सजाने वाली जर्मनी की परंपरा भी ले आये । जब राजसी जोड़े की तस्वीर उनके 40 फुट ऊँचे सजे हुए क्रिसमस ट्री के साथ (1848 में) आई तो इंग्लैंड के लोगों की रूचि भी इस पेड़ सजाने की परंपरा में जागी । आज अमेरिका में 21000 क्रिसमस ट्री उगाने वाले हैं और करीब 30-35 मिलियन असली क्रिसमस ट्री अकेले अमेरिका में बेचने के लिए काटे जाते हैं । इन पौधों की उम्र 15 साल तक की होती है ।

सैंटा क्लॉज़ का जिक्र भी आपको बाइबिल में नहीं मिलेगा । सैल्वेशन आर्मी (Salvation Army) सैंटा क्लॉस के हुलिये वाले चंदा इकठ्ठा करने वालों को 1890 के दौर से ही भेजती रही है । ये सैंटा क्लॉस मीरा के संत निकोलस (Saint Nicholas of Mira) पर आधारित हैं । ये एक डच संत थे जो उपहार देने के लिए प्रसिद्ध हैं । इन्हें स्थानीय तौर पर Sinterklass के नाम से जाना जाता था । इनके कई हुलिये अलग अलग समय में 1880 से 1900 के शुरुआती दौर में नजर आये । आज जो लाल कपड़ों वाले सैंटा क्लॉज का रूप रंग और हुलिया आप पहचानते हैं वो 1930 में आया एक कोका कोला के प्रचार से आया । फरों वाले लाल कपड़ों वाला सैंटा क्लॉज़ पहली बार वहीँ से नजर आने लगा । रुडोल्फ (Rudolph), नाम के रेनडियर (the most famous reindeer of all) की कल्पना Robert L. May ने साल 1939 में की । वो कॉपीराइटर थे और ग्राहकों को मोंट्गोमेरी वार्ड डिपार्टमेंट स्टोर (Montgomery Ward department store) में लुभाने के लिए ये गाना लिखा गया था । क्रिसमस पर कार्ड भेजने कि परंपरा भी लगभग इसी समय में शुरू हुई ।

क्रिसमस और थैंक्स गिविंग के साथ एक और परंपरा जुडी हुई है । वो है टर्की(turkey) यानि तीतर ! इस अवसर पर करीब 20 मिलियन तितर इंग्लैंड में और लगभग 100 मिलियन अमेरिका में मारे जाते हैं । दुनियां भर में हर जगह तितर आसानी से उपलब्ध नहीं हैं तो वहां मुर्गे से काम चलाया जाता है । ये जो तितर होते हैं उनका वजन 8-9 किलो के आस पास तक का होता था, लेकिन व्यावसायिक हितों को देखते हुए अब इसे जेनेटिक मॉडिफिकेशन के तरीकों से 13-15 किलो तक का बना दिया गया है । जंगलों में या आजादी में ये 10 साल तक आराम से जीने वाली चिड़िया है, लेकिन जो ये क्रिसमस के लिए पैदा की जाती हैं वो मुश्किल से 6 महीने जी पाती हैं । उस से पहले ही इन लाखों तीतरों को काट कर पका कर थालियों में खाने के लिए सजा दिया जाता है । उपहारों के व्यवसायीकरण यानि हर जगह बिकते क्रिसमस की तैयारियों के साजो सामान पर भी आपका ध्यान गया ही होगा ?

तो कुल मिला कर आप देखेंगे तो ये तथाकथित “त्यौहार” पूंजीवादी हिंसा का त्यौहार है । ऐसे में आप ये भी सोच सकते हैं कि क्रिसमस की ख़ुशी ख़ुशी बधाई देने वाले और त्यौहार को बढ़ावा देते सभी दलित चिंतक और कम्युनिस्ट चिंतक ओर्थडोक्स चर्च और ईसाई धार्मिक मान्यताओं के विरोधी हैं । या फिर ऐसा भी मान सकते हैं की वो भोले भाले लोग हैं । उन्हें बाजार की सजावट में पूंजीवाद नहीं दिखता । लाखों क्रिसमस ट्री के काटे जाने में उन्हें पर्यावरण पर असर नहीं दिखता । लाखों लाख तीतरों, मुर्गों के मारे जाने में इनका दिल नहीं दुखता ! उन्हें इसमें हिंसा नहीं दिखती ।

बाकि जो लोग उन्हें छल से पूंजीवादी व्यवस्था का पोषण करने वाला कहते हैं उन्हें पता ही क्या है ? किसी ऐसी संस्थाओं से वो चंदा भी नहीं लेते भाई ! आप अफवाहों पर ध्यान मत दीजिये । क्रिसमस मनाइये ।

ऑर्थडॉक्स चर्च के अनुनायियों से माफ़ी के साथ… Merry Christmas !!

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आनंद मार्केट रिसर्च में काम करते हैं, और शब्दों में रूचि रखते हैं। किताबों के अपने शौक में वो खूब सारी किताबें पढ़ते हैं। लोगों से बातचीत, समाजशास्त्र, पौराणिक कथाओं, इतिहास से वो अक्सर रोचक कहानियां ढूंढ लाते हैं।

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