कर्ण को सूत-पुत्र और राधेयभी कहा गया है | इनके अतिरिक्त कर्ण को वसुषेणतथा वैकर्तननाम से भी जाना जाता है | कर्ण महाभारत के शायद सबसे चर्चित पात्र हैं | द्रौपदी के बाद सबसे ज्याद इनका ही जिक्र होता होगा |

द्रुपद के यहाँ अर्जुन के पूर्व कर्ण ने मत्स्यवेध किया था परन्तु द्रौपदी ने कर्ण के साथ विवाह करना अस्वीकार कर दिया। फलत: कर्ण ने अपने को विशेष रूप से अपमानित समझा। कर्ण की पत्नी का पद्मावती तथा पुत्रों का वृषकेतु, वृषसेन आदि नामोल्लेख मिलता है | मान्यता है की कर्ण की पत्नी भी उसे सम्मान नहीं देती थी, द्रौपदी की ही तरह वो भी कर्ण को नीच कुल का मानती थी |

युद्ध का सत्रहवां दिन | कौरव सेना के नए सेना नायक कर्ण का सामना आज अर्जुन से होना तय था | संसप्तक ज्यादा देर अर्जुन को रोक नहीं पाते, फिर उनका सारथी श्री कृष्ण जैसा ! रथ के संचालन के लिए कर्ण ने दुर्योधन से शल्य को माँगा | शल्य पांडवों के मामा थे और कर्ण के घोर विरोधी | रथ चलाते चलाते भी उनके व्यंग बाणों से कर्ण छलनी होता रहा | कवच कुंडल अब था नहीं, इंद्र की दी हुई अमोघ शक्ति भी घटोत्कच पर खर्च हो चुकी थी | लेकिन कर्ण के लड़ने की योग्यता अब भी उसके साथ थी |

अर्जुन ने कर्ण के सारथी शल्य को घायल कर दिया। कर्ण ने अग्नि-बाण छोड़ा तो अर्जुन ने जल-बाण। कर्ण ने वायु-अस्त्र चलाकर बादलों को उड़ा दिया। अर्जुन ने नागास्त्र छोड़ा, जिसके उत्तर में कर्ण ने गरुड़ास्त्र। कर्ण के इस अस्त्र की काट अर्जुन के पास “नारायणास्त्र” थी, परंतु मनुष्य-युद्ध में वर्जित होने के कारण अर्जुन ने उसे नहीं छोड़ा। कर्ण ने एक दिव्य बाण छोड़ा तो कृष्ण ने घोड़ों को घुटनों के बल झुका दिया। इसी समय कर्ण के रथ का पहिया ज़मीन में धँस गया। कर्ण ने धर्म युद्ध के अनुसार कुछ देर बाण न चलाने की प्रार्थना की, अर्जुन रुक गए | तभी अचानक श्री कृष्ण ने कहा, पार्थ 
आज इन्हें धर्म युद्ध याद आता है |

भरी सभा में द्रौपदी को बुलाते समय इनका धर्म कहाँ गया था ? अकेले अभिमन्यु पर जब सात महारथियों ने हमला किया तब धर्म कहाँ था ? अभिमन्यु और द्रौपदी के प्रकरण याद आते ही अर्जुन ने बाण चला दिया |

जसोदा “बहन” को न्याय दिलाने की बातें करने वालों को भी आज सार्वजनिक और व्यक्तिगत जीवन याद आ रहा है |

अहो भाग्य, पार्थ ! कर्ण को आज धर्म और अधर्म याद आता है ! नारी मुक्ति नहीं याद आ रही पार्थ, नैतिक और अनैतिक याद आता है !


चलाओ बाण !!

(February 20, 2015)
SHARE
Previous articleबिल्ली दूध पीना छोड़ देगी
Next articleकुछ रिश्ते डूबे तो डूबे…
आनंद मार्केट रिसर्च में काम करते हैं, और शब्दों में रूचि रखते हैं। किताबों के अपने शौक में वो खूब सारी किताबें पढ़ते हैं। लोगों से बातचीत, समाजशास्त्र, पौराणिक कथाओं, इतिहास से वो अक्सर रोचक कहानियां ढूंढ लाते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here