लक्ष्य फिल्म के आखरी दृश्य में जब हृतिक पीछे की सीधी चढ़ाई से ऊपर जा कर पाकिस्तानियों पर हमला करने जा रहा होता है तो उसे कवर करने के लिए आगे से आर्टिलरी फायरिंग कर रही होती है | भारतीय आर्टिलरी फायरिंग से परेशान पाकिस्तानी बैठ कर बात कर रहे होते हैं की ये कवर फायर तो अपनी फौज़ को आगे बढ़ने के लिए दिया जाता है | जब सामने से कोई आ ही नहीं रहा तो गोला बारी हो क्यों रही है ?
इस तरीके की लड़ाई को ज्यादा अच्छे से समझना हो तो आपको एक अंग्रेजी फ़िल्म देखनी चाहिए, The Shawshank Redemption | बहुत ज्यादा पुरानी फिल्म नहीं है, काफी नामी भी है | इसमें एक आदमी को अपनी बीवी पे शक होता है तो एक रात वो दारू पी के रिवाल्वर लेकर घर पहुँचता है | घर में झाँक कर देखता है तो बीवी उसकी किसी और के साथ कुछ कर रही होती है | ये देखकर बेचारे को इतनी घिन आती है की वो वापिस अपनी कार में जा बैठता है और फिर से दारू पीने लगता है | पी पी कर कार में ही बेहोश हो जाता है |
अगली सुबह पुलिस आती है तो उसकी बीवी और बीवी का यार मरे पड़े होते हैं और ये दारू पी के बेहोश | गोली इसकी ही पिस्तौल से चली थी इसलिए मुक़दमा भी इसी पर चलता है | सारे सबूत इसके खिलाफ थे इसलिए उम्र कैद हो जाती है | अमरीका में भारत जैसा 14 साल वाला मामला नहीं होता उम्र कैद में वहां ये दो दो सौ साल तक जा सकती है | तो साहब ये आदमी बिना क़त्ल किये ही जेल पहुँच गया | फिर जेल में भले आदमी की क्या बुरी हालत होती है वो दिखाते हैं |
लेकिन ये आदमी पेशे से टैक्स कंसलटेंट होता है, भारत के CA जैसा कुछ | तो एक दिन ये जेल में किसी अधिकारी की टैक्स का सारा पैसा बचाने में मदद कर देता है | धीरे धीरे कई पुलिस वाले इस से मदद लेने लगते हैं | सारे पुलिस वालों की मदद के एवज में इसे कुछ सुविधाएँ भी मिलने लगती हैं | तो बदले में ये छोटी छोटी कलाकीर्तियाँ बनाने के लिए एक छोटी सी हथोडी मांग लेता है | बिलकुल छोटी सी होती है करीब दो सौ ग्राम की एक साइड हथोडी और दुसरे साइड खुरचने के लिए एक नोक | किसी ने गिफ्ट में एक मर्लिन मुनरो का पोस्टर भी दे दिया |
जो जेलर था वो भी बाकि कई पुलिस वालों के जैसा ही भ्रष्ट था | उसे अपनी काली कमाई छुपानी थी तो जेल में ही बरसों के लिए बंद कैदी से बेहतर कौन मिलता ? वो भी इसे टैक्स कंसलटेंट की मदद लेने लगता है | दस बारह साल इसी तरह निकल जाते हैं | जेल में एक नया लड़का आता है जिसे टैक्स कंसलटेंट अपने बेटे जैसा ट्रीट करने लगता है | इस लड़के को टैक्स कंसलटेंट की बीवी के असली कातिल के बारे में भी पता होता है | अब जेलर सोचता है की अगर कहीं कंसलटेंट ने इस नए लड़के को जेलर के पैसे की हेरा फेरी का कुछ बता दिया तो बड़ी आफत हो जाएगी | तो जेलर तिकड़म भिड़ता है और नए लौंडे को जेल से भागने का मौका देता है | लड़का जैसे ही भागने की कोशिश करता है पहले से ही घात लगाये पुलिस वाले उसे गोली मार देते हैं |
टैक्स कंसलटेंट अब और दुखी हो जाता है | लेकिन कैद सदियों जैसी थी तो कुछ कर भी नहीं सकता था | रोज़ वो जेलर की उसके कर्मचारियों की पैसे की हेरा फेरी में मदद करता, जेलर के जूते पॉलिश करता, जेल के मैदान में इधर उधर चक्कर लगता फिर शाम होते ही जब कमरे में बंद कर दिया जाता था तो वो बाइबिल पढता और छोटी छोटी मूर्तियाँ और शतरंज की गोटियाँ बनता था |
इसी तरह उन्नीस साल बीत गए | एक सुबह जब कैदियों की गिनती हुई तो एक कैदी कम था ! जेलर भागा भागा आया, एक नज़र में ही दिख गया की टैक्स कंसलटेंट गायब है ! जांच की गई तो पता चला की जेल की उसकी कोठरी तो खुली ही नहीं है ! पलंग कम्बल हटा कर सुरंग खोजने की कोशिश की गई कुछ नहीं निकला | खिड़की के छड़ भी सही सलामत थे ! कोई निकलने का रास्ता नहीं ! अब तो गुस्से गुस्से में वहीँ टंगा मर्लिन मुनरो का पोस्टर जेलर ने फाड़ डाला | और जैसे ही फटा पोस्टर, निकला हीरो !!
करीब छः इंच की हथोडी के खुरचने वाले हिस्से से टैक्स कंसलटेंट ने सुरंग खोद डाली थी ! शरीफ़ होने की नौटंकी थी, सबकी मदद करना बहाना था, जूतों की पॉलिश ढोंग था उसका, अकेले मैदान में चक्कर लगाने जितना दुखी भी नहीं था वो | ये सारे का सारा कवर फायर था ताकि कोई सुरंग के बारे में सपने में भी ना सोचे |
अब जरा टीवी पर न्यूज़ देखिये | तरह तरह की सनसनी वाली खबरें हैं, emotion के पूरे तड़के के साथ ! कभी कोई रोता नज़र आएगा प्राइम टाइम पर कभी किसी से अल्पसंख्यकों से धोखाधड़ी का इलज़ाम | हिन्द महासागर में सामरिक महत्व के समझौतों जैसी महत्वपूर्ण ख़बरें गायब हैं लेकिन मंदिर में पूजा वाली भड़काऊ रिपोर्ट पूरी आ रही है | ये कवर फायर है किसके लिए भैया ? जिस पत्रकार के घर बैठकर अल्पसंख्यकों के वोट बैंक की दलाली हो रही थी उसे ही गायब करना चाहते हो न ?
पत्रकार का नाम दलाली में आ जाये तो “निश्कच्छता” जो घोषित हो जाएगी ! अपनी दही को खट्टा कौन कहे बन्धु ! बहुत क्रन्तिकारी कदम !! बहुत क्रन्तिकारी !!
(March 14, 2015)
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आनंद मार्केट रिसर्च में काम करते हैं, और शब्दों में रूचि रखते हैं। किताबों के अपने शौक में वो खूब सारी किताबें पढ़ते हैं। लोगों से बातचीत, समाजशास्त्र, पौराणिक कथाओं, इतिहास से वो अक्सर रोचक कहानियां ढूंढ लाते हैं।

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